Bangladesh Measles: बांग्लादेश में खसरे के बढ़ते केसों के बीच टेस्टिंग किट की कमी! जांच रुकने की कगार पर
Bangladesh Measles Crisis: बांग्लादेश में इन दिनों खसरे का प्रकोप जरी है। खसरे से 300 से ज्यादा मौतें हुई हैं। किट की कमी से 11 मई के बाद जांच रुक सकती है, जिससे स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।
- Written By: प्रिया सिंह
बांग्लादेशी महिलाएं और बच्चे (सोर्स - सोशल मीडिया)
Bangladesh Measles Crisis Outbreak: बांग्लादेश में इन दिनों खसरे की बीमारी ने बहुत ही भयानक रूप ले लिया है। पूरे देश में खसरे का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और अब तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालात इतने खराब हैं कि देश की इकलौती लैब में टेस्टिंग किट की भारी कमी हो गई है। समय पर नई किट न मिलने से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है।
मोहखाली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ की लैब में हर रोज करीब 300 सैंपल की नियमित जांच होती है। लेकिन अगर 11 मई के बाद किट नहीं मिलीं तो पूरे देश में खसरे की जांच पूरी तरह से बंद हो जाएगी। इससे यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाएगा कि असल में कितने लोग इस गंभीर बीमारी से संक्रमित हैं। अधिकारी इस स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं और तेज संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।
जांच की किट की भारी किल्लत
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से लैब को टेस्टिंग किट्स दी जाती हैं, जिससे एक किट से 90 लोगों की जांच होती है। सोमवार तक लैब में केवल सात किट बची थीं, जो अगले दो दिन में लगभग खत्म हो गईं। वायरोलॉजिस्ट महबूबा जमील ने बताया कि किट्स खत्म होने की सूचना डब्ल्यूएचओ को दे दी गई है। नई किट आने में अभी कम से कम एक से डेढ़ हफ्ता लग सकता है, जो काफी चिंता का विषय है।
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इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर मोमिनुर रहमान ने कहा कि लगभग एक महीने पहले डब्ल्यूएचओ को किट की मांग भेजी गई थी। उन्हें पूरी उम्मीद है कि 15 मई तक लैब को नई किट की पूरी सप्लाई मिल जाएगी। तब तक बची हुई कुछ पुरानी किट से ही मरीजों की टेस्टिंग का काम चलाया जा रहा है। लेकिन यह नाकाफी है और जांच न होने से कई सैंपल लैब में बिना टेस्ट के पड़े हुए हैं।
गंभीर लक्षण और मौत का खतरा
डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि इलाज में थोड़ी सी भी देरी बीमार बच्चों के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। बच्चों में सांस लेने में दिक्कत, ऑक्सीजन की भारी कमी और दिमाग में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्हें लंबे समय तक दस्त और दौरे पड़ रहे हैं जिससे बीमारी में मौत का खतरा भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार एक संक्रमित व्यक्ति से 16 से 18 लोगों तक यह बीमारी आसानी से फैल सकती है।
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पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट मुश्ताक हुसैन के अनुसार, खसरे की गंभीरता को देखते हुए इसे तुरंत पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर देना चाहिए था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तुरंत बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चलाने की सबसे ज्यादा जरूरत है। किट सिर्फ संख्या बताती है लेकिन संक्रमण को जड़ से रोकने में वैक्सीन सबसे अधिक असरदार होती है। उपजिला स्तर पर भी इलाज की बेहतर सुविधाएं और ऑक्सीजन बढ़ाना इस समय बहुत ज्यादा अनिवार्य है।
