शेख हसीना को वापस लाने के लिए अब इंटरपोल की मदद लेगी बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, क्या कामयाब हो पाएगा मोहम्मद यूनुस का प्लान

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इंटरपोल से रेड कॉर्नर को नोटिस अलर्ट जारी करने के लिए कह रही है। बांग्लादेश में छात्रों की अगुवाई वाले विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान 700 से अधिक लोग मारे गए थे।
बांग्लादेश में न होकर भी सोशल मीडिया पर छाईं शेख हसीना, ICT ने कसा शिकंजा
शेख हसीना Pic: Social Media
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ढाका: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना को वापस लाने के लिए मशक्कत कर रहा है। यूनुस सरकार का कहना है। वह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने और उनकी पार्टी के अन्य भगोड़े नेताओं को ढूंढने के लिए ग्लोबल पुलिस एजेंसी इंटरपोल की मदद लेगी।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इंटरपोल से रेड कॉर्नर को नोटिस अलर्ट जारी करने के लिए कह रही है। बांग्लादेश में छात्रों की अगुवाई वाले विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान 700 से अधिक लोग मारे गए थे।

हसीना और अवामी लीग के अन्य फरार नेताओं पर आरोप है कि जुलाई अगस्त में हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन का उन्होंने ही आदेश दिया था। नई अंतरिम सरकार ने हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप लगाए हैं।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की अगुवाई मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं। जिन्होंने व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार के पतन के बाद 8 अगस्त को सत्ता की बागडोर संभाली थी।

अवामी लीग का यूनुस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

बांग्लादेश में तख्तापलट होने के बाद से ये देश अभी तक शांत नहीं हो सका है। अब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग आज ढाका में मौजूदा अंतरिम सरकार के खिलाफ बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन के मूड में है। जिसे देखते हुए अंतरिम युनूस सरकार ने सेना को सड़कों पर उतार दिया है।

शेख हसीना की ताकत हो रोकने के लिए मोहम्मद यूनुस ने सेना की 191 टुकड़ियों को तैनात की। इस बीच ढाका में अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर पुलिस ने सख्ती बरती है। उनके विरोध प्रदर्शन के पहले शेख हसीना के सैकड़ों समर्थकों को अरेस्ट कर लिया गया है।

बता दें कि बांग्लादेश साल 2024 के जुलाई महीने से अशांत है। इस तरह से देखें तो पांच महीने होने को हैं। इस बीच कई प्रत्याशित घटनाएं घटीं। जिसे देख पूरी दुनिया हतप्रथ रही। पड़ोसी देश भारत समेत तमाम देशों से लेकर अमेरिका तक की प्रतिक्रियाएं आईं। लेकिन स्थितियां अभी तक सामान्य नहीं हो पाई हैं।

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