दीपू दास के परिवार ने सरकारी मुआवजा ठुकराया (सोर्स- सोशल मीडिया)
Dipu Chandra Das Murder Case: बांग्लादेश के मयमनसिंह में कट्टरपंथियों की भीड़ द्वारा दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या के बाद, उनका परिवार आज युनूस को करारा तमाचा मार चुका है। गरीब परिवार जिसने अपना एकमात्र कमाऊ सदस्य खो दिया है, ने युनूस से लाखों रुपये लेने से साफ इनकार कर दिया। हिंदू परिवार का यह साहसिक कदम बांग्लादेश में चुनाव से कुछ ही घंटे पहले उठाया गया, जो युनूस के लिए केवल अपमान ही नहीं बल्कि सत्ता को झकझोरने वाला संदेश भी है।
दीपू को मारने वालों को न्याय दिलाने में विफल रहने के बावजूद, युनूस खुद माफी मांगने नहीं गए; इसके बजाय उन्होंने अपने दूत को भेजकर परिवार को पैसों का लालच दिया। लेकिन गरीब परिवार ने युनूस सरकार के मुआवजे की पेशकश को ठुकरा दिया।
दीपू चंद्र दास के पिता रबी चंद्र दास ने बेहद भावुक स्वर में कहा कि वे सिर्प पैसे नहीं चाहते, बल्कि उनके बेटे को मारने वालों को कड़ी सजा चाहते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य दीपू था और अगर कोई आरोप था भी, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए थी, भीड़ की हिंसा नहीं। दीपू की मां और पत्नी अभी गहरे सदमे में हैं और किसी भी मुआवजे से उनका दर्द नहीं मिटाया जा सकता।
युनूस के दूत बनकर शिक्षा सलाहकार डॉ. सी.आर. आबरार ने चुनाव से दो दिन पहले दीपू के परिवार को घर बनाने के लिए 19.25 लाख रुपये, पिता को 7.7 लाख रुपये, पत्नी को 7.7 लाख रुपये और बच्चे के भविष्य के लिए 3.85 लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा। लेकिन परिवार ने इस सरकारी सहायता को ठुकरा दिया। रबी चंद्र दास ने कहा, “पैसे से मेरा बेटा वापस नहीं आएगा।”
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दीपू की हत्या ईशनिंदा के झूठे आरोपों के कारण हुई थी। भीड़ ने उसे पीट-पीट कर मार डाला और उसकी लाश को चौराहे पर बांधकर आग लगा दी। इस घटना के समय युनूस सरकार की तरफ से कोई तुरंत प्रतिक्रिया नहीं आई, और जब पूरी दुनिया ने निंदा की, तब उन्होंने एक बयान जारी किया। उनके पहले बयान में न तो पश्चाताप था और न ही परिवार के प्रति कोई संवेदना।