बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए मतदान आज (सोर्स- सोशल मीडिया)
2026 Bangladesh Elections: भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय अपने इतिहास के एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले व्यापक जनआंदोलन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी। अब 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव लोकतंत्र की बहाली की दिशा में पहला बड़ा कदम माने जा रहे हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की देखरेख में हो रहे इन चुनावों पर न केवल बांग्लादेश, बल्कि भारत की भी करीबी नजर है।
यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक नए बांग्लादेश के निर्माण की परीक्षा भी है। देशभर में लगभग 43,000 मतदान केंद्रों पर 13 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। बाग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक चुनाव में कुल 51 राजनितिक पार्टियां हिस्सा ले रहे ही है, निर्दलीय उम्मीदवारों को मिला दे तो करीब 200O उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इतने बड़े लोकतांत्रिक अभ्यास में सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अंतरिम सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
भारत की दिलचस्पी बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों में केवल भौगोलिक निकटता के कारण नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक कारणों से भी है। 1947 के विभाजन के बाद यह क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान बना था, जो भौगोलिक रूप से भारत से घिरा हुआ था। 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत के हस्तक्षेप के बाद बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बना और भारत उसे मान्यता देने वाला पहला देश था।
हालांकि दोनों देशों के संबंध समय-समय पर बदलते रहे हैं। शेख हसीना की अवामी लीग को आम तौर पर भारत का करीबी माना जाता रहा, जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी को लेकर भारत में आशंकाएं बनी रहीं, क्योंकि उनका झुकाव पाकिस्तान की ओर और विचारधारा इस्लामी मानी जाती है।
लगभग 15 वर्षों तक सत्ता में रहीं शेख हसीना के लिए जुलाई 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन निर्णायक साबित हुआ। यह आंदोलन जल्द ही देशव्यापी विरोध में बदल गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में लगभग 1,400 लोगों की जान गई।
5 अगस्त 2024 को हालात बिगड़ने पर शेख हसीना को सैन्य हेलीकॉप्टर से भारत आना पड़ा। वे वर्तमान में दिल्ली में रह रही हैं। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने उन्हें विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के मामलों में दोषी ठहराते हुए गैरहाजिरी में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। बांग्लादेश सरकार ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी की है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ा है।
शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय, के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि की खबरें सामने आई हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त से दिसंबर 2024 के बीच सांप्रदायिक हिंसा की हजारों घटनाएं दर्ज की गईं। भारत सरकार ने भी संसद में बताया कि 5 अगस्त 2024 से 23 मार्च 2025 के बीच अल्पसंख्यकों से जुड़ी 2,400 से अधिक घटनाएं सामने आईं।
इन घटनाओं के कारण दोनों देशों के संबंधों में ठंडापन आया। कुछ समय के लिए वीजा सेवाएं भी निलंबित रहीं और खेल के क्षेत्र में भी इसका असर देखा गया।
चुनाव प्रचार के दौरान भारत के साथ संबंध, सीमा विवाद और तीस्ता नदी जल बंटवारा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने सुलह का संदेश देते हुए कहा है कि उनकी पार्टी प्रतिशोध नहीं, बल्कि न्याय और मानवता की राजनीति में विश्वास करती है। जमात-ए-इस्लामी ने भी पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंधों का वादा किया है और पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।
बदलते हालात के बीच भारत ने भी संतुलित रुख अपनाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ढाका में तारिक रहमान से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पत्र सौंपा। यह संकेत है कि भारत लोकतांत्रिक परिवर्तन के बाद नए समीकरण बनाने के लिए तैयार है।
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करीब 44% मतदाता 18 से 37 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जो इस चुनाव को युवा ऊर्जा प्रदान करते हैं। बांग्लादेश अब लोकतंत्र की मजबूती, गार्मेंट निर्यात उद्योग के पुनरुद्धार और भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
Ans: ये चुनाव 2024 के जनआंदोलन के बाद लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की पहली बड़ी परीक्षा हैं। इससे तय होगा कि देश में राजनीतिक स्थिरता, संस्थागत सुधार और भविष्य की शासन व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
Ans: नई सरकार के गठन से सुरक्षा सहयोग, व्यापार, सीमा प्रबंधन और तीस्ता जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर नीतियों में बदलाव संभव है, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों की नई रूपरेखा बन सकती है।
Ans: निष्पक्ष चुनाव कराना, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और गार्मेंट उद्योग सहित अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना अंतरिम सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां हैं।