इजराइल के बाद इस देश से भिड़ने की तैयारी में ईरान, वापस बुलाया दूत, खामेनेई का पारा हाई
Iran News: ईरान और ऑस्ट्रेलिया के बीच तनाव बढ़ गया है, जब ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने यहूदियों पर हमलों की साजिश का आरोप लगाया, जिसके बाद ईरान ने अपने राजदूत को वापस बुला लिया।
- Written By: अक्षय साहू
ईरान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ा विवाद (फोटो- सोशल मीडिया)
Iran-Australia Controversy: इजराइल के बाद ईरान ने अपना नया दुश्मन देश खोज लिया है। यह देश है ऑस्ट्रेलिया जिसके साथ ईरान के संबंध पिछले कुछ समय से सही नहीं चल रहे हैं। दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि ईरान ने ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूत अहमद सादेघी को वापस बुला लिया है। इस विवाद के पीछे बिते दिनों ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के एक बयान को माना जा रहा है।
अल्बानीज ने कुछ दिन पहले ईरान पर यहूदियों पर हमलों की साजिश रचने का आरोप लगाया था। उन्होंने सीधे तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को चेतावनी देते हुए बयान दिया था। इसके बाद ईरानी राजदूत अहमद सादेघी को ऑस्ट्रेलिया छोड़ते देखा गया। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ही अल्बनीज सरकार ने उन्हें देश छोड़ने का आदेश दिया था।
यहूदियों के खिलाफ साजिश का आरोप
अल्बनीज ने आरोप लगाया था कि तेहरान ने ऑस्ट्रेलिया में यहूदी समुदाय को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसियों ने पाया कि अक्टूबर 2024 में सिडनी की यहूदी फूड कंपनी ‘लुईस कॉन्टिनेंटल किचन’ और दो महीने बाद मेलबर्न के ‘अडास इजराइल सिनागॉग’ पर आगजनी की साजिश रची गई थी।
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स्थानीय टीवी चैनल ‘नेटवर्क सेवन’ और ‘नेटवर्क नाइन’ ने सिडनी एयरपोर्ट पर उड़ान से पहले राजदूत सादेघी से बातचीत भी की। जानकारी के मुताबिक, सादेघी को यह आरोप सार्वजनिक होने से पहले ही ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों द्वारा अवगत करा दिया गया था।
इजराइल युद्ध के बाद बदला रूख
जानकारों का मानना है कि अल्बनीज पहले ईरान के खिलाफ इतनी सख्ती के पक्ष में नहीं थे। साल 2024 में भी, जब सादेघी के कुछ सोशल मीडिया पोस्ट विवादों में आए थे, तब उन पर कार्रवाई को लेकर अल्बनीज दबाव में थे, लेकिन उन्होंने तत्काल कोई कदम नहीं उठाया था।
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बता दें कि इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न शहरों में यहूदी-विरोधी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों को पहले से आशंका थी कि विदेशी एजेंट देश के अंदर हमले करवाने के लिए स्थानीय अपराधियों को पैसे दे रहे हैं। इसके बाद से सरकार ने ऐसे लोगों पर तेजी शिकंजा कसना शुरू किया।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
