ब्रिटिश डिप्टी पीएम डेविड लैमी, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
AI Impact Summit India UK: भारत की राजधानी आज से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में ‘AI इम्पैक्ट एक्सपो’ और समिट का उद्घाटन करेंगे, जिसमें दुनिया भर के दिग्गज नेता और तकनीक विशेषज्ञ जुट रहे हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर ब्रिटिश डिप्टी प्राइम मिनिस्टर डेविड लैमी ने बड़े उत्साह के साथ अपने देश का विजन साझा किया है।
ब्रिटिश डिप्टी पीएम डेविड लैमी ने समिट से पहले कहा कि AI केवल एक तकनीक नहीं है, बल्कि यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन का मुख्य फोकस इस बात पर होगा कि कैसे AI आर्थिक विकास (Growth) को गति दे सकता है, नई नौकरियां पैदा कर सकता है और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार ला सकता है।
लैमी के अनुसार, AI के जरिए डॉक्टरों को बीमारियों का तेजी से डायग्नोसिस करने में मदद मिलेगी, टीचर्स बच्चों की लर्निंग को व्यक्तिगत स्तर पर बेहतर बना सकेंगे और बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समिट अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ मिलकर AI की पूरी क्षमता को अनलॉक करने और मजबूत सुरक्षा मानक बनाने का एक अहम मौका है।
ब्रिटेन के AI मिनिस्टर कनिष्क नारायण, जो भारतीय मूल के हैं उन्होंने बताया कि AI का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हमारी पीढ़ी की सबसे खास टेक्नोलॉजी है और हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इसके फायदे कुछ ही लोगों के लिए आरक्षित न रहें। नारायण ने यह भी साझा किया कि ब्रिटेन और भारत के लोग न केवल दूसरों के बनाए AI का उपयोग करें बल्कि खुद इसे विकसित भी करें। कनिष्क नारायण दिल्ली के बाद बेंगलुरु का भी दौरा करेंगे ताकि भारत-यूके तकनीक सहयोग को और मजबूती दी जा सके।
समिट के दौरान इस बात पर भी चर्चा होगी कि कैसे भारत और ब्रिटेन एक-दूसरे के ‘नेचुरल टेक पार्टनर’ हैं। इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और विप्रो जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में अपना विस्तार कर रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटिश कंपनियां भारत में अपने बिजनेस से सालाना 47.5 बिलियन पाउंड से ज्यादा का राजस्व कमाती हैं।
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इस समिट को ‘ग्लोबल साउथ’ में अपनी तरह की पहली अंतरराष्ट्रीय AI गैदरिंग माना जा रहा है। यह आयोजन ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ के तीन सूत्रों पर आधारित है। 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस महाकुंभ में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा समेत 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा, समिट में 40 अफ्रीकी भाषाओं के लिए एक नए सपोर्ट हब की घोषणा भी की जा सकती है, जिससे तकनीक को अधिक समावेशी बनाया जा सके।