ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran to Buy Aircraft from America: अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में होने वाली बातचीत से पहले बड़ा खुलासा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार तेहरान अमेरिका के साथ तेल और गैस की बिक्री और एयरक्राफ्ट खरीद को लेकर बातचीत कर रहा है। अगर डील सफल होती है तो ईरान अमेरिका से एयरक्राफ्ट खरीदेगा। हालांकि, इसे लेकर अभी तक ईरान की ओर से कोई भी अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जानकारी के मुताबिक, यह इस्लामिक गणराज्य की शासन में पहली बार है जब ईरान अमेरिका से हथियार खरीदने पर विचार कर रहा है। 1979 के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ कोई भी प्रत्यक्ष व्यापारिक समझौता नहीं किया है। फार्स एजेंसी ने विदेश मंत्रालय के आर्थिक कूटनीति के उप निदेशक हामिद घनबरी के हवाले से कहा कि किसी भी समझौते की स्थायित्व के लिए यह जरूरी है कि अमेरिका को उन क्षेत्रों में लाभ मिले जिनमें उच्च और त्वरित आर्थिक प्रतिफल हो। इसलिए ईरान अमेरिका के साथ तेल, मिनरल्स और हथियारों को लेकर डील कर रहा है।
डील में आर्थिक लाभ की कोशिश
हामिद घनबरी के अनुसार, 2015 में ईरान-अमेरिका परमाणु डील में अमेरिका को कोई फायदा नहीं हुआ और अंततः उसने उस डील को निरस्त कर दिया। इस बार ईरान चाहता है कि अमेरिका को डील में आर्थिक लाभ मिले, ताकि भविष्य में समझौता अचानक रद्द न हो।
ईरान के सामने मुख्य खतरा सिर्फ अमेरिका से है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में ईरान के करीब दो युद्धपोत तैनात किए हैं। ईरान के लिए जंग लड़ना आसान नहीं है और उसकी सरकार इस स्थिति से बचना चाहती है।
ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित रखना चाहता है और इसलिए अमेरिका को अपने पक्ष में लाने के लिए हथियार खरीदने जैसी डील की पेशकश कर रहा है। वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने सभी संवर्धित यूरेनियम को खत्म कर दे।
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कार्नेगी एंडॉमेंट के सीनियर फेलो डेविड एरॉन के अनुसार, मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति जितनी व्यापक होगी, ईरान को इसे रोकने के लिए उतनी ही बड़ी रियायत देनी पड़ेगी। यदि कोई रियायत नहीं दी जाती है तो हमले और भी अधिक महत्वाकांक्षी और भीषण हो सकते हैं। ईरान इस बात को अच्छी तरह समझता है।