सीजफायर पर मंडरा रहा खतरा! बिलावल भुट्टो की बेचैनी बढ़ी, शहबाज शरीफ बोले- हम तैयार हैं…
पाकिस्तानी नेताओं को अब संघर्षविराम (सीजफायर) के टूटने की चिंता सताने लगी है। कभी सिंधु नदी को खून से लाल करने की धमकी देने वाले बिलावल भुट्टो अब शांति भंग होने की आशंका से घबराए हुए नजर आ रहे हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय
बिलावल भुट्टो, फोटो ( सो. सोशल मीडिया)
इस्लामाबाद: ऑपरेशन सिंदूर की विश्वभर में सराहना हो रही है। इस अभियान के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई वायुसेना अड्डों और रडार प्रणालियों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इसके बाद जब पाकिस्तान कमजोर पड़ गया, तो उसने भारत को युद्धविराम का प्रस्ताव दिया। वहीं अब पाकिस्तान के कुछ नेताओं को इस युद्धविराम के टूटने की आशंका सताने लगी है।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने एक इंटरव्यू में अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि सीजफायर टूटा तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम को बनाए रखना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए एक बड़ी चुनौती है।
संघर्षविराम टूटने का सता रहा डर
बिलावल भुट्टो ने कहा कि फिलहाल संघर्षविराम लागू है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। पाकिस्तान अमन और शांति चाहता है, लेकिन भारत के अंदरूनी राजनीतिक हालात की वजह से भारत की ओर से जो बयान आ रहे हैं, उससे हमें डर लग रहा है कि यह संघर्षविराम टूट सकता है। यदि ऐसा हुआ तो यह न सिर्फ दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरनाक होगा। यह समय एक बड़ा परीक्षण है राष्ट्रपति ट्रंप, पीएम शहबाज शरीफ और पीएम नरेंद्र मोदी के लिए हम दुआ करते हैं कि वे इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लें।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को पंजाब प्रांत का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सैन्य संघर्ष में शामिल अधिकारियों और सैनिकों से बातचीत की। शहबाज शरीफ ने कहा कि वे भारत के साथ शांति स्थापित करने के लिए बातचीत करने को तैयार हैं। उनके साथ उपप्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भी मौजूद थे।
उन्होंने बातचीत के लिए कश्मीर मुद्दे को भी शर्तों में शामिल करने की बात कही। आपको यह भी याद दिला दें कि भारत ने पूरी दुनिया को इस बात को बता दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
