60 दिन, 6 अरब डॉलर और दुनिया की निगाहें; जानें अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले इस समझौते की पूरी इनसाइड स्टोरी
US Iran Peace Talks: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता शुरू हो रही है। अमेरिका ने परमाणु ठिकानों के निरीक्षण के बदले ईरान को 6 अरब डॉलर देने का प्रस्ताव रखा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
मोजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप, AI फोटो
US Iran Peace Talks Switzerland: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर आज से स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में शुरू होने जा रहा है। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य परमाणु कार्यक्रमों पर लगाम लगाना और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस उच्च-स्तरीय बातचीत में हिस्सा लेने के लिए पहले ही पहुंच चुके हैं। यह बैठक पिछले सप्ताह हुए अंतरिम शांति समझौते का हिस्सा है, जिसमें दोनों देशों को स्थायी समाधान खोजने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है।
क्या है 6 अरब डॉलर का मामला?
इस वार्ता की मेज पर सबसे बड़ा प्रस्ताव परमाणु ठिकानों की जांच से जुड़ा है। वाशिंगटन चाहता है कि तेहरान संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षकों को अपने उन परमाणु ठिकानों का दौरा करने और गहन जांच करने की अनुमति दे, जिनका आखिरी निरीक्षण जून 2025 में हुआ था।
इसके बदले में, अमेरिका ईरान को बड़ी वित्तीय राहत देने के लिए तैयार है। रिपोर्ट के अनुसार, कतर में जमे हुए ईरान के 6 अरब डॉलर की राशि को जारी किया जा सकता है। हालांकि, अमेरिका ने यह शर्त रखी है कि इस राशि का उपयोग केवल मानवीय जरूरतों जैसे खाद्य सामग्री, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए ही किया जाएगा।
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शहबाज और मुनीर भी पहुंचे है स्विट्जरलैंड
इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ के रूप में उभर कर सामने आया है। वार्ता में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं।
वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अरागची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। जेडी वेंस ने उम्मीद जताई है कि यह बातचीत इजराइल-लेबनान संघर्ष और परमाणु सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करेगी।
खुफिया एजेंसियों ने दी चेतावनी
जहां एक तरफ शांति की कोशिशें हो रही हैं, वहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक बड़ा अलर्ट भी जारी किया है। एजेंसियों के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस शांति प्रक्रिया में बाधा बन सकते हैं। घरेलू राजनीतिक दबाव के चलते नेतन्याहू लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखना चाहते हैं, जो सीधे तौर पर इस वार्ता को प्रभावित कर सकती है।
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वैश्विक व्यापार पर संकट
वार्ता के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि जब तक 60 दिनों की यह बातचीत चल रही है, तब तक वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शांति समझौता विफल होता है तो अमेरिका भविष्य में कड़े कदम उठा सकता है और जहाजों पर शुल्क लागू कर सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह 60 दिनों की समय सीमा पश्चिम एशिया को युद्ध की आग से बचा पाएगी।
