संत निवृत्तीनाथ महाराज पालकी की तैयारियां पूरी, सुरेगांव की बैल जोड़ी को मिला रथ खींचने का सम्मान

Sinnar News: सिन्नर तहसील के सुरेगांव निवासी संपत भालेराव की बैल जोड़ी को पालकी रथ सेवा का बहुमान मिला है। इससे उनके परिवार का तीन पीढ़ियों पुराना सपना आखिरकार सच हो गया है।
Sampat Bhalerao's bullock pair from Suregaon, Sinnar, has been selected for the prestigious Palkhi Rath Seva, fulfilling his family's three-generation-old dream.
सुरेगांव की बैल (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Sinnar Suregaon Palkhi Rath: श्री संतश्रेष्ठ निवृत्तीनाथ महाराज पालकी समारोह की तैयारियों को समाधि संस्थान ने अंतिम रूप दे दिया है। इस वर्ष पालकी रथ और नगाड़ा गाड़ी खींचने का ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण सम्मान पहली बार सिन्नर तहसील को प्राप्त हुआ है। इस निर्णय से पूरे क्षेत्र में उत्साह और आनंद का वातावरण बना हुआ है।

समाधि संस्थान ने सिन्नर तहसील के सुरेगांव निवासी किसान संपत भालेराव की 'चित्या' और 'धिंगाण्या' नामक खिल्लारी नस्ल की बैल जोड़ी का चयन पालकी रथ सेवा के लिए किया है। धार्मिक परंपरा में इस सेवा को अत्यंत पवित्र और प्रतिष्ठित माना जाता है।

संस्थान की ओर से रथ खींचने के लिए सक्षम एवं मजबूत बैलों के चयन हेतु विभिन्न क्षेत्रों के बैल मालिकों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। चयन प्रक्रिया के दौरान बैलों की ताकत, अनुशासन, सहनशक्ति तथा लंबी पैदल यात्रा के दौरान दिंडी के साथ चलने की क्षमता जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर गहन परीक्षण किया गया। इन सभी कसौटियों पर खरा उतरते हुए सुरेगांव की 'चित्या' और 'धिंगाण्या' बैल जोड़ी ने बाजी मार ली।

संस्थान के अध्यक्ष राहुल महाराज सालुके तथा विश्वस्त मंडल के सदस्यों ने बैलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने के बाद अंतिम चयन की घोषणा की। इस अवसर पर भालेराव परिवार की वर्षों पुरानी साधना और परंपरा भी चर्चा का विषय बनी रही।
संपत भालेराव के दादा लहानू भालेराव और पिता नामदेव भालेराव ने भी अपने जीवनकाल में पालकी रथ सेवा का सम्मान प्राप्त करने के लिए प्रयास किए थे। इसी उद्देश्य से उनके परिवार में हमेशा मजबूत, सुंदर और बलवान बैल पालने की परंपरा चली आ रही है। अब तीसरी पीढ़ी के रूप में संपत भालेराव का यह सपना साकार हुआ है, जिससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।

स्थानीय नागरिकों और वारकरी समुदाय ने इस चयन का स्वागत करते हुए इसे सिन्नर तहसील के लिए गौरव का क्षण बताया है। पालकी समारोह में सुरेगांव की बैल जोड़ी की सहभागिता इस वर्ष की यात्रा का विशेष आकर्षण रहने वाली है।

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