आसिम मुनीर की ‘फोन कॉल डिप्लोमेसी’ रंग लाई: ईरान वार्ता के लिए तैयार, शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचेंगे अराघची
Abbas Araghchi Islamabad Visit: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची दूसरे दौर की शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यह अच्छी डील करने का मौका है।
- Written By: अमन उपाध्याय
इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका शांति वार्ता, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Abbas Araghchi Islamabad Visit Iran US Peace Talks: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार देर रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। यह दौरा इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता की संभावना जताई जा रही है। अराघची की इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय बातचीत के साथ-साथ क्षेत्र में जारी युद्ध की ताजा स्थिति पर चर्चा करना है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और आर्मी चीफ का फोन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पहले दूसरे दौर की बातचीत से इनकार कर दिया था। 22 अप्रैल को दोनों देशों के बीच 14 दिनों से चला आ रहा सीजफायर खत्म हो गया था लेकिन ईरान वार्ता की मेज पर आने को तैयार नहीं था। हालांकि, स्थिति तब बदली जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बातचीत की। इसी बातचीत के बाद अराघची इस्लामाबाद आने के लिए राजी हुए हैं।
‘ईरान के पास खुला मौका’
ईरान के रुख में आए इस बदलाव के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। हेगसेथ ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि ईरान के पास अमेरिका के साथ एक अच्छी डील करने का यह बेहतरीन अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को वार्ता की मेज पर समझदारी से फैसला लेना चाहिए। गौरतलब है कि अमेरिका की एक लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम पहले से ही इस्लामाबाद में मौजूद है, जो किसी बड़े डेलिगेशन के आने की तैयारी का संकेत है।
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इस्लामाबाद में किले जैसी सुरक्षा
शांति वार्ता की आहट के बीच इस्लामाबाद को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। शहर के ‘रेड जोन’ और ‘ब्लू एरिया’ में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, प्रमुख सड़कें बंद हैं और बाजार सुनसान पड़े हैं। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इस वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन किसी भी समय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के पहुंचने के लिए तैयार है।
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2.9 लाख करोड़ का नुकसान
शांति की यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के लिए भी यह युद्ध भारी पड़ता दिख रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक अमेरिका इस जंग में 2.9 लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुका है और उसके हथियारों के भंडार में भी कमी आने लगी है। ऐसे में दोनों ही पक्ष अब किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने की कोशिश कर सकते हैं। पाकिस्तान के बाद अराघची के ओमान और रूस जाने का भी कार्यक्रम है।
