नंदीग्राम का वो ऐतिहासिक आंदोलन, जिसने सुवेंदु अधिकारी को बनाया बड़ा नेता; अब संभालेंगे बंगाल की कमान
Suvendu Adhikari: साल 2027 में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में वह भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी (BUPC) को लीड कर रहे थे।
- Written By: मनोज आर्या
सुवेंदु अधिकारी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Suvendu Adhikari In Nandigram Movement:पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज शुक्रवार, (8 मई, 2026) किसी ऐतिहासिक दिन से कम नहीं है। क्योंकि अब तक के ऐतिहास में पहली बार राज्य में भारतीय जनता पार्टी ने अपने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया है। 2026 विधानसभा चुनाव मे मिली प्रचंड बहुमत के बाद बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना है। अब वह पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम का ऐलान किया। शनिवार, 9 मई को वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
बंगाल के नए मुख्यमंत्री के तौरा पर नाम की घोषणा के बाद सुवेंदु अधिकारी काफी सुर्खियों में हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी कई जानकारियां साझा की जा रही है। इसी कड़ी में एक ऐसे आंदलोन का भी जिक्र किया जा रहा है, जिसने सुवेंदु अधिकारी को मास लीडर के रूप में स्थापित किया था। इस आंदोलन के बाद से राज्य की सियासत में उनका कद काफी ऊंचा हुआ।
नंदीग्राम आंदोलन में सुवेंदु अधिकारी की भूमिका
साल 2027 में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन में वह भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी (BUPC) को लीड कर रहे थे। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी लेफ्ट फ्रंट सरकार ने स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाने के लिए गांव में 10,000 एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई। ये वहीं आंदोलन था, जिसने ममता बनर्जी को बंगाली राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया। राज्य की CID ने आरोप लगाया कि सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार के खिलाफ हथियारबंद आंदोलन छेड़ने के लिए माओवादियों को हथियार दिए थे।
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आंदोलन की सफलता के बाद ममता का साथ
नंदीग्राम आंदोलन में मजबूती से खड़ा रहने के बाद ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी को जंगल महल यानी पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया और बांकुरा जिलों का पार्टी ऑब्जर्वर (इंचार्ज) बनाया। वह इन जिलों में पार्टी का आधार बढ़ाने में सफल रहे। 2009 में, वह तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए। उन्होंने अपने सबसे करीबी विरोधी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के लक्ष्मण सेठ को लगभग 173,000 वोटों के अंतर से हराया था, जो कि एक बड़ी जीत थी।
ममता सरकार में बने परिवहन मंत्री
सुवेंदु अधिकारी अपनी सियासी करियर की शुरुआत से ही जोखिम उठाने के लिए जाने जाते हैं। 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा। यहां उनका मुकाबला लेफ्ट फ्रंट-इंडियन नेशनल कांग्रेस गठबंधन के अब्दुल कादिर शेख से था। इस चुनाव में मिली जीत के बाद उन्होंने तमलुक सीट से सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह 27 मई 2016 को ममता बनर्जी की दूसरी सरकार में परिवहन मंत्री बनें।
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कैसे हुई थी सियासी सफर की शुरुआत?
बता दें कि साल 1995 में पहली सुवेंदु अधिकारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से कांथी नगरपालिका में पार्षद चुने गए थे। जिसके बाद साल 2006 में वह कांथी दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक बनें। उसी साल में वह कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष भी रहे थे।
