बंगाल वोटर लिस्ट अपडेट: क्या एडमिट कार्ड बनेगा जन्म का प्रमाण? चुनाव आयोग ने दिए सख्त निर्देश

Bengal Election Guidelines: बंगाल के सीईओ ने माध्यमिक एडमिट कार्ड को वैध दस्तावेज मानने की सिफारिश की है। साथ ही बुजुर्गों-बीमारों के लिए घर पर सुनवाई और बीएलओ पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
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West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के बीच मतदाता सूची को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी है। राज्य चुनाव आयोग ने माध्यमिक एडमिट कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में मान्यता देने की सिफारिश की है, जिससे हजारों मतदाताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर सुनवाई जारी है। इस दौरान कई ऐसे मतदाता सामने आए हैं जिनके पास आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र नहीं है, लेकिन उनके पास सेकेंडरी एग्जाम का एडमिट कार्ड है जिसमें जन्मतिथि दर्ज है। बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग से सिफारिश की है कि इस एडमिट कार्ड को एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। यदि आयोग इसे मंजूरी देता है, तो पश्चिम बंगाल देश का पहला राज्य बन जाएगा जहां एडमिट कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में मान्यता मिलेगी। गौरतलब है कि बिहार में इसी तरह के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था।

घर पर सुनवाई: बुजुर्गों और बीमारों को विशेष छूट

चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को सुनवाई केंद्रों पर आने की आवश्यकता नहीं है। इन श्रेणियों के मतदाताओं की सुनवाई उनके घर पर ही की जाएगी। आयोग ने यह भी साफ किया है कि घर पर सुनवाई की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जाएगी।

लापरवाही बरतने वाले BLOs पर होगी कार्रवाई

आयोग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बीमार और बुजुर्ग लोगों को केंद्रों पर आने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित BLO और BLO सुपरवाइजर के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संवेदनशील श्रेणियों के वोटरों को केंद्रों पर बुलाकर परेशान न करें।

चाय बागान मजदूरों के लिए विशेष प्रावधान

दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी के चाय बागान मजदूरों के लिए भी आयोग ने राहत दी है। कई मजदूर पीढ़ियों से वहां काम कर रहे हैं लेकिन उनके पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि केवल दस्तावेजों की कमी के कारण उनके नाम लिस्ट से बाहर न किए जाएं और चाय बागान लेबर एक्ट के तहत उनकी जानकारी को वेरिफाई किया जाए।

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