
'प्रगति' मीटिंग लेते हुए पीएम मोदी, फोटो- सोशल मीडिया
50th Meeting of PRAGATI: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 2015 में शुरू किया गया ‘प्रगति’ मॉडल भारतीय शासन व्यवस्था का ‘गेम-चेंजर’ साबित हुआ है। इस डिजिटल मंच के माध्यम से अब तक दशकों से अटकी 94% समस्याओं का समाधान कर विकास की गति को कई गुना बढ़ाया गया है, जिससे आम लोगों के जीवन में सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘प्रगति’ की 50वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह मंच पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सहयोगी और रिजल्ट ओरिएंटेड शासन की एक खास उपलब्धि बनकर उभरा है। कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने एक प्रेजेंटेशन में बताया कि इस प्लेटफॉर्म ने अब तक ₹85 लाख करोड़ से अधिक के 3,300 से अधिक प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि जब निर्णय समय पर लिए जाते हैं और जवाबदेही तय होती है, तो सरकारी कामकाज की गति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। उन्होंने याद किया कि इस विजन की शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके ‘स्वागत’ (SWAGAT) प्लेटफॉर्म के अनुभव से हुई थी, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया गया है।
‘प्रगति’ की सबसे बड़ी सफलता उन परियोजनाओं को पूरा करना रही है जो दशकों से फाइलों में दबी थीं। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि कई प्रोजेक्ट्स जो 2014 से पहले भुला दिए गए थे, उन्हें राष्ट्रीय हित में पुनर्जीवित किया गया है। प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं:
• बोगीबील रेल-सड़क पुल (असम): इसकी परिकल्पना पहली बार 1997 में की गई थी।
• जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बरामूला रेल लिंक: इसका काम 1995 में शुरू हुआ था।
• नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: इसकी कल्पना 1997 में की गई थी।
• भिलाई इस्पात संयंत्र का आधुनिकीकरण: इसे 2007 में मंजूरी मिली थी।
इन सभी परियोजनाओं को प्रगति प्लेटफॉर्म के तहत लाने के बाद या तो पूरा कर लिया गया है या निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया गया है।
नेशनल मीडिया सेंटर में प्रगति मीटिंग, फोटो- सोशल मीडिया
प्रगति केवल बैठकों का दौर नहीं, बल्कि समस्या-समाधान का एक सशक्त तंत्र है। रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से अब तक प्रगति के तहत 377 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की गई है। इन परियोजनाओं में पहचाने गए 3,162 मुद्दों में से 2,958 (लगभग 94 प्रतिशत) का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। इसके साथ ही इस मंच ने जन शिकायतों के निवारण में भी बड़ी भूमिका निभाई है। अब तक 61 सरकारी योजनाओं और 36 विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 7,156 शिकायतों को सुलझाया गया है। इनमें से 382 अत्यंत गंभीर और जटिल मामलों की समीक्षा खुद प्रधानमंत्री मोदी ने की है।
‘प्रगति’ एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित बहु-मॉडल प्लेटफॉर्म है, जो तीन नवीनतम तकनीकों- डिजिटल डेटा प्रबंधन, वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग और भू-स्थानिक (Geo-spatial) प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है। यह एक त्रिस्तरीय प्रणाली है जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्र सरकार के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव शामिल होते हैं।
कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रोजेक्ट्स में देरी की मुख्य वजह केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के बीच समन्वय की कमी थी। प्रगति ने इसको खत्म किया और ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत किया है। अब तक लगभग 500 केंद्रीय सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव इन बैठकों का हिस्सा बन चुके हैं।
#NewsNight | कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन ने कहा कि प्रगति एक मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म के रूप में भारत की शासन व्यवस्था को बदल दिया है, और उन्होंने बताया कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट में प्रगति को विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यास मॉडल के रूप में… pic.twitter.com/9fAiVQgmwE — डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) January 2, 2026
एक दशक के अनुभव के बाद, सरकार ने यह सीखा है कि किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले ‘लैंड बैंक’ बनाना और एक बेहतर ‘डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (DPR) तैयार करना आवश्यक है। अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण के मामलों से अधिक संवेदनशीलता से निपटने के लिए मसूरी स्थित आईएएस ट्रेनिंग एकेडमी में एक विशेष कोर्स मॉड्यूल भी पढ़ाया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान में भूमि अधिग्रहण कानून को बदलने की कोई योजना नहीं है।
प्रधानमंत्री ने भविष्य के लिए स्पष्ट लक्ष्य साझा किए हैं। उन्होंने ‘विकसित भारत @ 2047‘ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सुधारों (Reform) का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाकर ‘ईज ऑफ लिविंग’ बढ़ाना होना चाहिए। उन्होंने राज्यों को प्रोत्साहित किया कि वे मुख्य सचिव स्तर पर सामाजिक क्षेत्रों के लिए भी ‘प्रगति’ जैसी व्यवस्था को संस्थागत रूप दें। 50वीं बैठक में ₹40,000 करोड़ से अधिक की 5 प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं और ‘पीएम श्री’ (PM SHRI) योजना की भी समीक्षा की गई, ताकि शिक्षा को भविष्य के अनुकूल बनाया जा सके।
Ans: यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
Ans: इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 मार्च 2015 को की गई थी।
Ans: इसके जरिए ₹85 लाख करोड़ से अधिक मूल्य के 3,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा कर उनमें तेजी लाई गई है।
Ans: प्रगति के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की 7,156 शिकायतों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया है।
Ans: इस मंच ने परियोजनाओं में पहचाने गए लगभग 94% (3,162 में से 2,958) मुद्दों का सफलतापूर्वक समाधान किया है।






