76 साल की रिटायर्ड महिला हर हफ्ते 400 बंदरों को खिलाती हैं खाना, सेवा की मिसाल बना जीवन
Monkey Feeding Story : तमिलनाडु की 76 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अधिकारी मालती पिछले कई वर्षों से हर शनिवार सैकड़ों बंदरों को खाना खिलाती हैं। उनकी यह सेवा अब लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
- Written By: हितेश तिवारी
वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
Animal Welfare : तमिलनाडु के तिरुप्परंकुंड्रम क्षेत्र से इंसानियत और पशु प्रेम की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां 76 वर्षीय मालती नाम की एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी पिछले कई वर्षों से सैकड़ों बंदरों को नियमित रूप से भोजन करा रही हैं। हर शनिवार दोपहर होते ही मंदिर परिसर और आसपास की पहाड़ियों में रहने वाले बंदर उनकी आवाज सुनकर इकट्ठा हो जाते हैं।
मालती अपनी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा इन जानवरों के भोजन पर खर्च करती हैं और इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य मानती हैं। उनकी यह अनोखी सेवा अब स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
#WATCH | Tamil Nadu: Malathi, a 76-year-old resident of Madurai, has been using a significant portion of her pension to feed monkeys living around Tirupparankundram since 2015. Despite her age and health challenges, she continues to visit several locations every Saturday, where… pic.twitter.com/3PBRtmdOao — ANI (@ANI) June 23, 2026
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76 वर्षीय महिला पेंशन से 400 बंदरों को खिलाती हैं खाना
मालती ने वर्ष 2010 में सेवानिवृत्ति ली थी। अपने करियर के दौरान उन्होंने तमिलनाडु पुलिस विभाग में 33 वर्षों तक सेवा की। इसके अलावा वह गांधिग्राम विश्वविद्यालय में शारीरिक शिक्षा निदेशक और कोडाइकनाल के एक अंतरराष्ट्रीय स्कूल में भी कार्य कर चुकी हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने तिरुप्परंकुंड्रम मुरुगन मंदिर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में बंदरों को भोजन के लिए संघर्ष करते देखा।
इसके बाद उन्होंने इन जानवरों की मदद करने का फैसला किया। शुरुआत में वह रोजाना वहां जाकर बंदरों को खाना खिलाती थीं, लेकिन बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अब वह हर शनिवार यह सेवा जारी रखती हैं। वह मंदिर परिसर, सरवणा पोइगई, मयिल थोप्पू और किले के आसपास समेत छह अलग-अलग स्थानों पर जाकर बंदरों को भोजन कराती हैं।
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जानवरों की सेवा देती है मानसिक शांति और खुशी
मालती के अनुसार इन क्षेत्रों में लगभग 350 से 400 बंदर रहते हैं और शनिवार को उनकी आवाज सुनते ही बड़ी संख्या में बंदर भोजन के लिए पहुंच जाते हैं। इनमें छोटे बच्चों से लेकर बड़े बंदर तक शामिल होते हैं। मालती कहती हैं कि इन जानवरों की सेवा करने से उन्हें मानसिक शांति, खुशी और जीवन का उद्देश्य मिलता है।
उनका कहना है कि जब तक उनका स्वास्थ्य साथ देगा, वह इस सेवा को जारी रखेंगी। उन्होंने बताया कि बंदरों का विश्वास और स्नेह उनके जीवन को विशेष अर्थ देता है और उनकी इच्छा है कि वह जीवन के अंतिम समय तक इस कार्य को करती रहें। उनकी यह कहानी समाज में करुणा, सेवा और पशु प्रेम का एक सुंदर उदाहरण पेश करती है।
