(सौजन्य सोशल मीडिया)
देहरादून : उत्तराखंड सरकार ने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। राज्य सरकार ने यहां शुक्रवार को सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक (GEP Index)की शुरुआत की जो जल, वायु, जंगल और जमीन की गुणवत्ता जैसे मानकों पर आधारित होगा। इसी के साथ यह सूचकांक शुरू करने वाला उत्तराखंड देश में ऐसा पहला राज्य बन गया है।
देहरादून में एक कार्यक्रम में जीईपी सूचकांक की शुरुआत करने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बन गया है कि जहां जीईपी सूचकांक की शुरुआत की गयी है।
GEP Index सबसे पहले उत्तराखंड में
उन्होंने कहा, ‘‘आज जल, जंगल, जमीन और वायु जैसे हमारे ऐसे सभी कारकों का सूचकांक जारी हुआ है, जो पर्यावरण को संरक्षित करते हैं। हमारा राज्य देश और दुनिया को पर्यावरण के क्षेत्र में एक दिशा देने का काम करता है और जीईपी सूचकांक की शुरुआत भी हमारे यहां सबसे पहले हुई है।” मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास की दौड़ के साथ व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण किस प्रकार कर रहा है, यह उसका सूचकांक है। उन्होंने कहा, ‘‘यानी हम अगर विकास के लिए बहुत से पेड़ों को काट रहे हैं तो उसके एवज में हम कितने पौधे लगा रहे हैं? हम पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में किस प्रकार का सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं, किस प्रकार के विकास के मॉडल को हम अपना रहे हैं? यह सूचकांक उसका द्योतक है।”
सूचकांक पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संकेतक
इस मौके पर पिछले डेढ़ दशक से जीईपी को लागू करने की वकालत कर रहे गैर सरकारी संगठन ‘हैस्को’ के संस्थापक पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि यह सूचकांक प्रदेश के पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संकेतक है जो भविष्य की दिशा तय करेगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न विकासपरक योजनाओं तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं का सकल रूप से पर्यावरणीय कारकों जैसे जल, जंगल, जमीन और वायु की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
GEP 3-5 प्रतिशत रखे जाने का लक्ष्य
पर्यावरणविद डॉ जोशी ने कहा कि अगर ये कारक बेहतर हो रहे हैं तो जीईपी सूचकांक में वृद्धि देखने को मिलेगी और ‘‘हम कह सकते हैं कि हमारा तंत्र पर्यावरण के अनुकूल है और विकास गतिविधियों के बावजूद स्थिर है।” उन्होंने कहा कि इसके विपरीत इन कारकों में गिरावट आने पर जीईपी सूचकांक नीचे आ जाएगा जो मानव के लिए चेतावनी होगी। डॉ जोशी ने कहा कि 2021-22 में जीईपी सूचकांक 0.9 प्रतिशत था जिसे तीन से पांच प्रतिशत रखे जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक (GEP Index) का शुभारंभ किया। निश्चित रूप से इस इंडेक्स के आकलन से इकोलॉजी एवं इकोनॉमी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। यह इंडेक्स भविष्य में राज्यहित में पॉलिसी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।… pic.twitter.com/dpqK7KquSW
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 19, 2024
‘ग्रीन बोनस’ की हो चुकी है मांग
इससे पहले वर्ष 2010-11 में राज्य सरकार ने प्रदेश की 65 प्रतिशत भूमि पर फैले जंगलों द्वारा देश और दुनिया को दी जा रही पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में ‘ग्रीन बोनस’ दिये जाने की परिकल्पना पेश की थी। इसके बाद, डॉ जोशी की याचिका पर हाई कोर्ट ने जीईपी शुरू करने का निर्देश दिया था। इसी निर्देश पर राज्य सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यावरण सेवाओं के मूल्य और पर्यावरण को हुए नुकसान के अंतर को शामिल कर जीईपी की परिभाषा अधिसूचित की।
(एजेंसी इनपुट के साथ)