हल्द्वानी बनभूलपुरा अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णायक फैसला आज, छावनी में तब्दील हुआ शहर

Haldwani: 29 एकड़ रेलवे भूमि पर अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। नैनीताल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है और बनभूलपुरा को 'जीरो जोन' घोषित कर भारी सुरक्षा बल तैनात है।
Haldwani Banbhoolpura case
हल्द्वानी बनभूलपुरा अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णायक फैसला आज, फोटो- सोशल मीडिया
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Haldwani Banbhulpura Encroachment: उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना अहम फैसला सुनाने जा रहा है। पूरे देश की निगाहें इस आदेश पर हैं, जिसके मद्देनजर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र से जुड़े रेलवे अतिक्रमण मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट एक निर्णायक फैसला सुनाने जा रहा है। यह कानूनी प्रक्रिया पिछले कई महीनों से चल रही थी और यह आदेश लगभग 29 एकड़ रेलवे भूमि पर बसे अतिक्रमण को लेकर अंतिम रूप देगा। इस आदेश पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह न केवल स्थानीय लोगों के भविष्य को तय करेगा, बल्कि रेलवे भूमि प्रबंधन और अतिक्रमण के मामलों पर एक बड़ा कानूनी मिसाल भी स्थापित कर सकता है।

'जीरो जोन' घोषित, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल

फैसले से पहले नैनीताल जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से हाई अलर्ट पर हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे बनभूलपुरा क्षेत्र में आरपीएफ, रेलवे पुलिस, पीएसी, पैरामिलिट्री फोर्स और उत्तराखंड पुलिस को भारी संख्या में तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बल को एलएमजी सहित आधुनिक हथियारों से लैस किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे। बनभूलपुरा क्षेत्र में सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक कड़ी पाबंदियां लागू की गई हैं, और इस दौरान लोगों की आवाजाही को सख्ती से मॉनिटर किया जा रहा है। पुलिस एरिया डोमिनेशन बढ़ाने के लिए लगातार फ्लैग मार्च कर रही है। प्रशासन ने बनभूलपुरा को 'जीरो जोन' घोषित कर दिया है, जिसका अर्थ है कि यहां किसी भी तरह की भीड़, सभा या अनधिकृत गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध है।

एंटी-सबोटाज ऑपरेशन और सीसीटीवी से निगरानी

सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसके तहत संवेदनशील जगहों पर सघन चेकिंग, बैरिकेडिंग, पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च बढ़ाने को कहा गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति को उत्पन्न होने से रोकने के लिए, बीडीएस (बम निरोधक दस्ते) टीमों ने पूरे क्षेत्र में बम जांच और एंटी-सबोटाज ऑपरेशन भी शुरू कर दिए हैं।

सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी निगरानी का दायरा भी काफी बढ़ा दिया गया है। बनभूलपुरा के गफूर बस्ती, लाइन नंबर 17 और आसपास की गलियों में लगभग 45 कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जा रही है। पिछली बार हुई हिंसा में जो कैमरे क्षतिग्रस्त हो गए थे, उन्हें मरम्मत कर फिर से सक्रिय कर दिया गया है। रेलवे ने भी अपने परिसर और ट्रैक के पास करीब 25 कैमरे स्थापित किए हैं, जिससे स्टेशन और उसके आसपास की सुरक्षा पर कड़ी नजर रखी जा सके।

क्या है पूरा मामला?

साल 2022 में बनभूलपुरा अतिक्रमण प्रकरण को लेकर नैनीताल हाई कोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई थी। इसके आधार पर हाई कोर्ट ने 2023 में अतिक्रमित क्षेत्र से कब्जे हटाने का आदेश दिया। आदेश का पालन करते हुए प्रशासन ने रेलवे विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई भी शुरू की, लेकिन स्थानीय विरोध के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। तब से यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अनुमान लगाया जा रहा था कि 2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है, लेकिन किसी कारणवश सुनवाई उस दिन स्थगित कर दी गई। इसके बाद अगली तारीख 10 दिसंबर यानी आज के लिए तय की गई है।

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