देहरादून में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की पिटाई, फोटो- सोशल मीडिया
Dehradun News Update: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उस समय हड़कंप मच गया जब सत्ताधारी दल के विधायक पर शिक्षा विभाग के निदेशक के साथ मारपीट और जानलेवा हमले का आरोप लगा। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि निदेशालय में दहशत और कर्मचारियों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय परिसर उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया, जब भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी विशेष मुद्दे को लेकर विधायक और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के बीच चर्चा हो रही थी। यह चर्चा जल्द ही तीखी बहस में बदल गई और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया। आरोप है कि इस दौरान प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौटियाल पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वे चोटिल हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तुरंत उपचार के लिए राजकीय जिला चिकित्सालय, देहरादून में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
ये हैं हमारे भाजपा विधायक..उमेश शर्मा काऊ..इसलिए चुना था लोगों ने pic.twitter.com/wyWDIllW4Y — NAVEEN UNIYAL (@uniyal85) February 21, 2026
जैसे ही निदेशक के साथ मारपीट की खबर निदेशालय के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों तक पहुंची, पूरे परिसर में आक्रोश की लहर दौड़ गई। कर्मचारियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि गुस्साए कर्मचारियों ने कथित तौर पर भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ को कार्यालय के भीतर ही घेर लिया और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया।
हालांकि, यह घेराबंदी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। बताया जा रहा है कि विधायक के समर्थक बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और उन्होंने कमरे का दरवाजा तोड़कर विधायक को बाहर निकाल लिया। इस दौरान समर्थकों और कर्मचारियों के बीच जमकर नोकझोंक और तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
इस घटना के विरोध में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने इसे प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन और सीधे तौर पर तंत्र पर हमला बताया है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि यदि विभाग के सर्वोच्च पदों पर बैठे अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो सामान्य कर्मचारी अपनी सुरक्षा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। इसी आक्रोश के चलते कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इस हड़ताल की वजह से शिक्षा निदेशालय के साथ-साथ राज्य के अन्य विभागीय कामकाज और शैक्षणिक कार्यों पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें: भिवंडी कोर्ट में राहुल गांधी ने नया बॉन्ड साइन किया, 2014 में RSS के खिलाफ टिप्पणी मामले में हुई थी पेशी
इस पूरे प्रकरण ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने भाजपा विधायक पर लगे आरोपों को लेकर सरकार को घेरा है और इसे सत्ता के दुरुपयोग का चरम बताया है। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अभी तक विधायक उमेश शर्मा काऊ की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उच्चाधिकारियों को घटना की रिपोर्ट भेज दी गई है और पुलिस तथ्यों को जुटाने में लगी है ताकि विवाद के असली कारणों और चूक के स्तर का पता लगाया जा सके। फिलहाल, निदेशालय में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।