नसीमुद्दीन सिद्दीकी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nasimuddin Siddiqui Resignation: उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। सूबे में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इसका असर 2027 विधानसभा चुनावों पर भी हो सकता है। यही वजह है कि उनके इस्तीफे ने यूपी का सियासी पारा चढ़ा दिया है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी के साथ-साथ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को अपना इस्तीफा प्रेषित किया है। उनके साथ कई अन्य समर्थकों ने भी पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।
सिद्दीकी के इस्तीफे को उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में कांग्रेस के लिए एक बड़े सियासी झटके के रूप में देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे से कांग्रेस को जो मुस्लिम वोट मिल रहे हैं उनमें कमी आएगी। यही वजह है कि पार्टी वरिष्ठ नेता सिद्दीकी से संपर्क साधने और उन्हें मनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। सूत्रों की माने तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी उन्हें मनाने के लिए उनके आवास पर जा सकते हैं।
पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे के पत्र में किसी स्पष्ट वजह का उल्लेख नहीं किया है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे लंबे समय से शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे थे और खुद को पार्टी में साइडलाइन महसूस कर रहे थे। जिसके बाद अब उन्होंने अपने कई समर्थकों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा दिया है।
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कहा कि वह कांग्रेस में अपने सभी साथियों के साथ इसलिए शामिल हुए थे कि जातिवाद और संप्रदायवाद के साथ हो रहे अन्याय की लड़ाई लड़ी जा सके लेकिन कांग्रेस में रह कर वह यह लड़ाई नहीं लड़ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ इस्तीफा देने वाले सभी लोगों से मशविरा किया जा रहा है। जिस तरफ सहमति बनेगी उसी दल के साथ मिलकर आगे जनता की लड़ाई लड़ी जाएगी।
दूसरी तरफ राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी एक बार फिर से अपनी पुरानी पार्टी का रुख कर सकते हैं। गौरतलब है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी पहले राज्य की मायावती सरकार में मंत्री रह चुके हैं। तब सियासी हलकों में उन्हें मिनी सीएम कहा जाता था। हालांकि साल 2017 में बसपा सुप्रीमो ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।