मणिशंकर अय्यर और शशि थरूर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Congress on Iran War: ईरान युद्ध के बीच कांग्रेस पार्टी जहां सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रही है, वहीं पार्टी के भीतर ही विदेश नीति को लेकर घमासान मच गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। थरूर ने अय्यर के एक खुले पत्र का तीखा और विस्तृत जवाब दिया है।
हाल ही में मणिशंकर अय्यर ने फ्रंटलाइन मैगजीन में एक खुला पत्र लिखकर शशि थरूर की विदेश नीति संबंधी टिप्पणियों पर सवाल खड़े किए थे। इसके जवाब में थरूर ने एक पोस्ट लिखकर कहा है कि लोकतंत्र में अलग राय रखना गलत नहीं है, लेकिन इसके आधार पर किसी की नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना बिल्कुल अनुचित है।
शशि थरूर ने अय्यर को संबोधित करते हुए लिखा कि मैने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखा है। मेरे लिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत का सम्मान सर्वोपरि है। दुनिया की राजनीतिक हकीकत को समझना और देश के हित में फैसले लेना कोई मोरल सरेंडर नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है।
थरूर ने इतिहास का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि भारत ने पहले भी राष्ट्रीय हित में कई बार दूसरे देशों की गलत कार्रवाइयों पर सार्वजनिक रूप से तुरंत विरोध नहीं किया। सोवियत यूनियन के साथ संबंधों के कारण हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान के मामलों में भी भारत का रुख बहुत संतुलित रहा था।
थरूर ने अपने हालिया लेख का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इसलिए इसे तुरंत खत्म होना चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका के साथ भारत के कई महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं, जिन्हें खतरे में डालना समझदारी नहीं है। विदेश नीति केवल भाषण देने की राजनीति नहीं है।
अपनी विदेश यात्राओं पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए शशि थरूर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया के सामने भारत का पक्ष साफ रखा गया था। भारत बुद्ध और गांधी की भूमि है जो शांति चाहती है, लेकिन शांति का मतलब कमजोरी नहीं है। यदि आतंकवाद से लोगों की जान जाएगी तो भारत उसका मजबूती से जवाब देगा।
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थरूर ने सबरीमाला मुद्दे पर भी अय्यर की आलोचना को अजीब बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ अय्यर उन्हें गलत विचारों के लिए कोसते हैं और दूसरी तरफ पार्टी के निर्णय के साथ खड़े होने के लिए भी आलोचना करते हैं। जन्मतिथि और उम्र को लेकर की गई टिप्पणी पर थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी का सम्मान करने के लिए उनकी गोद में खेलना जरूरी नहीं है। गांधी जी और नेहरू जी पर उन्होंने काफी कुछ लिखा है। देशभक्ति या इन महापुरुषों की विरासत पर किसी एक पीढ़ी या समूह का एकाधिकार नहीं है।
अंत में कांग्रेस सांसद ने अय्यर को याद दिलाया कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में उनका समर्थन किया था जिसके लिए वह आभारी हैं। जब अय्यर को पार्टी से निलंबित किया गया था तब थरूर ने भी उनका समर्थन किया था। थरूर ने कहा कि अय्यर की हालिया टिप्पणियों के बाद यह जवाब देना बेहद जरूरी हो गया था। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस के कुछ नेता पहले ही कह चुके हैं कि मणिशंकर अय्यर अब पार्टी का हिस्सा नहीं हैं।