धार्मिक काम में राजनीतिक हस्तक्षेप...अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर मायावती का बयान, कहा- लोगों में दुख और चिंता

Magh Mela Controversy: बसपा प्रमुख ने कहा कि राजनेताओं को अपने संवैधानिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। इस तरह के मामलों से आम लोगों में दुख और चिंता होना स्वाभाविक है।
Mayawati
मायावती (Image- Social Media)
Published on
Updated on

Shankaracharya Controversy: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर चल रहे विवाद पर पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में हर धर्म के पर्व-त्योहार, पूजा-पाठ और स्नान जैसे धार्मिक आयोजनों में प्रशासनिक हस्तक्षेप लगातार बढ़ा है। प्रशासन से टकराव के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बीते छह दिनों से अनशन पर बैठे हैं।

मायावती ने कहा कि इस तरह के मामलों से आम लोगों में दुख और चिंता होना स्वाभाविक है। उन्होंने बयान में कहा, “संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों के चलते धर्म को राजनीति से और राजनीति को धर्म से जोड़ने के खतरे हमेशा बने रहते हैं। प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा विवाद, आपसी अनादर और आरोप-प्रत्यारोप इसका ताजा उदाहरण है। ऐसी स्थितियों से हर हाल में बचना चाहिए।”

धर्म और राजनीति को अलग रखने की सलाह

बसपा प्रमुख ने कहा कि राजनेताओं को अपने संवैधानिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश का संविधान और कानून जनहित और जनकल्याणकारी कार्यों को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानता है। इसलिए राजनीति को धर्म से और धर्म को राजनीति से दूर रखना जरूरी है। यदि सही नीयत और नीति के साथ ऐसा किया जाए, तो बिना किसी भेदभाव के सर्वसमाज के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा संभव है।

जल्द समाधान की अपील

मायावती ने कहा कि प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा कड़वा विवाद आपसी सहमति से जितनी जल्दी सुलझ जाए, उतना ही बेहतर होगा। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।

क्या है पूरा मामला?

18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों का पुलिस-प्रशासन से टकराव हो गया था। प्रशासन का कहना है कि भारी भीड़ के बीच पालकी के साथ आगे बढ़ने की जिद से मेले में अव्यवस्था फैल सकती थी।

वहीं, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया। उनके समर्थकों, विशेषकर बटुकों के साथ मारपीट की गई और उन्हें स्नान से रोका गया। इसी के विरोध में वह घटनास्थल पर अनशन पर बैठे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मेला प्रशासन ने शुरुआत में ही मामले को बेहतर ढंग से संभाला होता, तो विवाद इतना नहीं बढ़ता।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com