‘वोट चाहिए तो पहले गौ-माता को राष्ट्रमाता बनाओ’, शंकराचार्य का बड़ा ऐलान, सरकार को दिया अल्टीमेटम
Shankaracharya Avimukteshwaranand: गविष्ठि यात्रा के तहत जालौन और झांसी पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ-रक्षा का आह्वान किया और गौ-माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग दोहराई।
- Written By: अर्पित शुक्ला
शंकराचार्य
Shankaracharya Avimukteshwaranand Gavishti Yatra: 81 दिवसीय गौ-रक्षा यात्री के क्रम में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के जालौन और झांसी जिलों में आयोजित जनसभाओं को संबोधित किया। जनसभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने मतदाताओं की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दल जनता के वोट से सत्ता में आते हैं और उसी सत्ता के माध्यम से कत्लखानों के लाइसेंस जारी किए जाते हैं तथा गौ-मांस निर्यात को बढ़ावा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया मतदाता से शुरू होती है और यदि मतदाता अनुमति न दें तो ऐसा संभव नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह प्रश्न उठाना है कि क्या जनता गौ-हत्या की सहमति देती है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों से स्पष्ट कहें कि वोट तभी मिलेगा जब गौ-माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए और गौ-हत्या पर रोक लगाई जाए।
गौ-माता के विरोधियों से संबंध समाप्त करने का आह्वान
जनसभा के दौरान शंकराचार्य ने उपस्थित लोगों से सामूहिक घोषणा भी करवाई। घोषणा में लोगों ने कहा कि गौ उनकी माता है और जो भी गौ-माता को नुकसान पहुंचाने या उसकी हत्या का प्रयास करेगा, चाहे वह किसी भी संत, पार्टी या नेता से जुड़ा हो, उससे उनका कोई संबंध नहीं रहेगा।
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उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संगठन के विरोध में नहीं, बल्कि गौ-माता के पक्ष में है। उनके अनुसार जो गौ-माता के पक्ष में है, वही उनका अपना है और जो विरोध में है, उससे उनका कोई संबंध नहीं है।
सरकारों की भूमिका पर टिप्पणी
अपने संबोधन में उन्होंने उन सरकारों की भी आलोचना की जो स्वयं को हिंदू हितैषी बताती हैं। उन्होंने कहा कि यदि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद गौ-माता की रक्षा नहीं हो सकी तो अन्य समस्याओं के समाधान पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि गौ-माता की रक्षा ही सरकारों की प्रतिबद्धता की सबसे बड़ी कसौटी है।
वैदिक मंत्र के साथ सामूहिक संकल्प
जनसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द ने चक्रधारी मुद्रा में दाहिना हाथ उठाकर पहली उंगली ऊपर करते हुए उपस्थित लोगों से तीन बार “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” मंत्र का उच्चारण कराया। उन्होंने मंत्र का अर्थ बताते हुए कहा कि जैसे इंद्र ने वृत्रासुर को पराजित कर गौ-वंश को मुक्त कराया था, उसी प्रकार गौ-माता को कष्ट देने वाली शक्तियों का सामना करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने लोगों से इस मंत्र और मुद्रा का प्रतिदिन अभ्यास करने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे भीतर रक्षा और संकल्प की शक्ति विकसित होगी।
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24 जुलाई को लखनऊ में अगले चरण की घोषणा का संकेत
गौरतलब है कि 3 मई 2026 को गोरखपुर से शुरू हुई ‘गविष्ठि यात्रा’ उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों की परिक्रमा कर रही है। शंकराचार्य ने कहा कि यदि 81 दिवसीय यात्रा के समापन तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में 2,18,700 धर्म-सैनिकों वाली ‘अक्षौहिणी सेना’ के साथ आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
