सपा या कांग्रेस, किसे किसकी ज्यादा जरूरत? सूबे की 143 सीटों के गणित ने बढ़ाई गठबंधन की सियासी टेंशन
SP Congress Alliance News: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। इमरान मसूद के बयान के बाद दोनों दलों में सियासी बयानबाजी बढ़ गई है।
- Written By: अमन मौर्या
अखिलेश यादव और राहुल गांधी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
UP Assembly Election 2026: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, लखनऊ में दौरा भी कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने सहयोगी दलों के साथ बैठक भी की। वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में अभी सीट बंटवारे को लेकर रस्साकसी चल रही है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सपा के लिए कांग्रेस जरूरी है या कांग्रेस के लिए अखिलेश का साथ। दोनों दलों में सीट बंटवारे को लेकर हो रही खींचतान, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयान खुलकर सामने आया है। उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि गठबंधन की जरूरत सपा को ज्यादा है।
सपा ने किया पलटवार
इमरान ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में गठबंधन की वजह से ही 37 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि बरगद के पेड़ के नीचे जो पेड़ निकलते हैं, वो सब पेड़ सूख जाते हैं। कांग्रेस अगर बरगद का पेड़ है, तो इसके नीचे कोई भी दल पनप नहीं सकता है। समाजवादी पार्टी आम का पेड़ है, जो आम के पेड़ के पत्ते भी काम-पूजा के आते हैं। इस तरह से कांग्रेस सांसद के बयान पर सपा ने भी जवाब दे दिया है, लेकिन सवाल अभी भी वही है कि आखिर किस पार्टी को कितनी जरूरत है?
सम्बंधित ख़बरें
यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार से गरमाई सियासत, राम मंदिर और पुराने बयानों को लेकर कई जिलों में लगे होर्डिंग
दतिया उपचुनाव: भाजपा के स्टार प्रचारकों में बाहरी चेहरों की भरमार, कांग्रेस ने लोकल लीडर्स पर लगाया दांव
इंदौर में कांग्रेस की साइक्लोथॉन के बाद हर तरफ फैला कचरा, नगर निगम ने लगाया स्पॉट फाइन, भाजपा ने साधा निशाना
दतिया उपचुनाव: BJP प्रत्याशी के साथ अवधेश नायक की तस्वीर वायरल, बोले- फिलहाल कांग्रेस छोड़ने का कोई इरादा नहीं
सपा की मजबूरी है कांग्रेस का साथ
उत्तर प्रदेश में भले ही सपा, कांग्रेस से ज्यादा मजबूत स्थित में है, लेकिन कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ना सपा की मजबूरी है। दरअसल, सूबे की करीब 143 सीटों पर मुस्लिम वोटरों का अच्छा खासा प्रभाव है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिमानों के एक बड़े हिस्सा शुरू से ही कांग्रेस को लेकर सकारात्मक रहा है। इसके अलावा बीते कुछ सालों से कांग्रेस ने मुस्लिम मतदाताओं के बीच खुद को स्थापित करने की कोशिश की है। सपा क मुख्य वोट समीकरण MY का है। ऐसे में कांग्रेस M को अपने पाले में लाने की लगातार कोशिश कर रही है।
ये भी पढे़ं- वक्फ संपत्तियों की जांच हुई तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी भूल जाएंगे… मौलाना रजवी का दावा, आजम खान पर गंभीर आरोप
कांग्रेस की तरफ से लोकसभा सांसद इमरान मसूद और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी सूबे में लगातार मुस्लिमों के बीच मौजूदगी दिखाई है। ऐसे में कांग्रेस को दरकिनार करना भी सपा के लिए आसान नहीं होगा। 2017 के विधानसभा चुनाव सपा ने कांग्रेस को 100 सीटें दी थीं, लेकिन उसे 6 पर ही सफलता मिली थी।
