जन्मदिन विशेष: फुटबॉल का जुनून, न चाहते हुए भी हुई राजनीति में एंट्री; दिलचस्प है टीपू से अखिलेश बनने की कहानी
Akhilesh Yadav Birthday: अखिलेश यादव को अपने स्कूल के दिनों से ही फुटबॉल का शौक था। कथित तौर पर एक बार फुटबॉल खेलते समय ही उनकी नाम पर चोट लग गई थी, जिसके निशान आज भी नजर आते हैं।
- Written By: मनोज आर्या
अखिलेश यादव जन्मदिन विशेष, (AI जेनरेटेड इमेज)
Akhilesh Yadav Birthday Special: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। 1 जुलाई, 1973 को यूपी के इटावा जिले के सैफई में उनका जन्म हुआ था। माता मालती देवी और पिता मुलायम यादव के वह इकलौते संतान हैं। उनके सौतेले भाई प्रतीक यादव का हाल ही में निधन हो गया है। अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। 38 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद, वे आज तक इस पद पर रहने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं।
अखिलेश यादव ने अपनी शुरुआती शिक्षा सैफई के एक स्थानीय स्कूल और फिर इटावा शहर में पूरी की। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान के धौलपुर में धौलपुर मिलिट्री स्कूल से आगे की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक के मैसूर यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर की डिग्री प्राप्त की। साल 2000 में कन्नौज लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़कर उन्होंने राजनीति में अपना कदम रखा।
‘टीपू’ से अखिलेश बनने की कहानी
अखिलेश यादव आज पूरे भारत में किसी पहचान के मोहताज नहीं है। उत्तर प्रदेश के अलावा भारत के कोने-कोने में समाजवादी पार्टी और अखिलेश के चाहने वाले लोग हैं। हालांकि, बहुत कम ही लोग होंगे, जिन्हें यह मालूम होगा कि बचपन में अखिलेश यादव का नाम ‘टिपू’ था। दरअसल, जब सैफई में अखिलेश यादव का जन्म हुआ था, तब गांव के प्रधान मुलायम सिंह यादव के दोस्त दर्शन सिंह ने मैसूर के वीर शासक ‘टीपू सुल्तान’ से प्ररेरित होकर उनका नाम ‘टीपू’ रख दिया था। हालाकिं, बाद में जब वे बड़े हुए तो स्कूल में एडिमशन के समय उनका नाम अखिलेश रखा गया।
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धौलपुर मिलिट्री स्कूल में पढाई के दौरान अखिलेश यादव, (सोर्स- समाजवादी पार्टी)
फुटबॉल और क्रिकेट के शौकीन
अखिलेश यादव को अपने स्कूल के दिनों से ही फुटबॉल और क्रिकेट खेलने का शौक था। कथित तौर पर एक बार फुटबॉल खेलते समय ही उनकी नाम पर चोट लग गई थी, जिसके निशान आज भी उनके नाक पर नजर आते हैं। अखिलेश डियागो माराडोना, पेले और जार्ज जैसे दिग्गज फुटबॉलरों को काफी पसंद करते हैं। कई बार वह राजनीतिक बयानों और विधानसभा में भी फुटबॉल और क्रिकेट का जिक्र कर चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी वह खेल के मैदान पर आमना-सामना करने की बात कह चुके हैं, जो कि कई बार सियासी गलियारों और सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहा है।
लंदन में बेटे के साथ फुटबॉल खेलते हुए अखिलेश यादव, (सोर्स- सोशल मीडिया)
न चाहते हुए भी हुई राजनीति में एंट्री
राजनीतिक परिवार में जन्में और पले-बढ़े अखिलेश यादव को कभी भी राजनीति में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। यहां तक कि उन्होंने कभी कॉलेज के दिनों में छात्र संघ के चुनाव तक नहीं लड़े। इसके बजाय, वह एक पर्यावरण इंजीनियर बनना चाहते थे। उन्होंने कर्नाटक के मैसूर से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री पूरी की और फिर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण इंजीनियरिंग में मास्टर की पढ़ाई की।
राजनीति में कदम रखने से पहले, वह जल प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने की योजना बना रहे थे। हालांकि, उनके पिता मुलायम सिंह यादव के कहने पर साल 2000 में पहली बार उन्होंने कन्नौज लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़कर राजनीति में कदम रखा और जीत हासिल की थी।
अखिलेश और डिंपल की प्रेम कहानी
अखिलेश यादव और डिंपल यादव की प्रेम कहानी भी बॉलीवुड की किसी फिल्म से कम नहीं है। साल 1990 में डिंपल और अखिलेश की लखनऊ में पहली बार मुलाकात हुई थी। इस समय अखिलेश यादव का उम्र 21 वर्ष था, जबकि डिंपल सिर्फ 17 साल की थीं। दोस्ती से शुरू हुआ यह रिश्ता जल्दी प्यार में बदल गया। साल 1996 में पढ़ाई के लिए अखिलेश ऑस्ट्रेलिया चले गए। हालांकि, दोनों के बीच दूरिया जरूर बढ़ी थी, लेकिन प्यार और ज्यादा बढ़ा गया। इस समय के दौरान अखिलेश और डिंपल एक दूसरे को लेटर और ग्रीटिंग कार्ड्स भेजा करते थे।
पत्नी डिंपल यादव के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव, (सोर्स- सोशल मीडिया)
शादी के लिए कैसे राजी हुआ परिवार?
अखिलेश यादव जब अपनी पढ़ाई पूरी कर ऑस्ट्रेलिया से भारत लौटे तब उन्होंने डिंपल के साथ शादी करने का मन बना लिया। हालांकि, इन दोनों की शादी इतनी आसान नहीं थी। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले अखिलेश और मिलिट्री परिवार से आने वालीं डिंपल की शादी को लेकर दोनों परिवारों में विवाद की स्थिति बन गई। पारिवार के विरोध के बाद भी अखिलेश ने अपनी दादी को डिंपल के बारे में सबकुछ बताया और उन्होंने ही इस रिश्ते का समर्थन किया। इसके बाद अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह यादव को मना लिया और आखिरकार 24 नवंबर 1999 को दोनों दोनों की शादी हुई।
