राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफों के बाद बढ़ा राजनीतिक घमासान, कांग्रेस-AAP ने उठाए सवाल
Ayodhya Ram Mandir: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए। इसके बाद विपक्षी दलों ने चंदे के कथित विवाद पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
अयोध्या राम मंदिर( सोर्स-सोशल मीडिया)
Ayodhya Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों के इस्तीफे मंजूर होने की जानकारी दी। इसके बाद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि केवल इस्तीफे स्वीकार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि कथित चंदा विवाद की निष्पक्ष जांच के बिना केवल इस्तीफे स्वीकार करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे किए स्वीकार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली ‘चंदा चोरी’ की रिपोर्टें वाकई सत्य हैं। यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते रहे। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
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हास्यास्पद बात यह है कि यह घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष द्वारा की गई – वही व्यक्ति जिस पर इसके वित्त की निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी संपत्तियों की रक्षा करने का दायित्व होता है। वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता, और न ही ट्रस्ट का कोई अन्य सदस्य इस दायित्व से किनारा कर सकता है, जिनकी देखरेख में इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा।”
ट्रस्ट के नए महासचिव पर साधा निशाना
उन्होंने आगे लिखा, “मूर्खता यहीं समाप्त नहीं होती। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया है, जबकि खुद उन पर इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं। उन्हें बड़े दायित्व से पुरस्कृत करने के बजाय ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था। देश टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे नहीं चाहता।
उसे ट्रस्ट को पूरी तरह भंग करके उसका पुनर्गठन चाहिए। देश ट्रस्ट के हर सदस्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट-निगरानी में एक स्वतंत्र जांच चाहता है। जवाबदेही सिर्फ ट्रस्ट पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री तक भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, जिन्होंने ट्रस्ट का गठन किया और उसके कई सदस्यों की नियुक्ति की।
इस्तीफा नहीं, दोषियों को कड़ी सजा मिले
वहीं ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हिंदू सनातनी को इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा चाहिए। इस्तीफा लेकर उन्हें बचाने की कोशिश मत करो।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि खबरों के मुताबिक, अयोध्या में राम मंदिर के दो ट्रस्टियों के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई है। ऐसा लगता है कि यह फैसला दान और राशि में धोखाधड़ी के आरोपों की वजह से लिया गया है। लेकिन इस बात का क्या कि उन्हें भाजपा की केंद्र सरकार ने ही नियुक्त किया था? मंदिर में हुई चोरी के बारे में क्या, उस मंदिर को लूटने की हिम्मत और अपराध के बारे में क्या, जिस पर भाजपा का पिछले दो दशकों का पूरा अभियान टिका था?
उन्होंने आगे कहा कि हमें निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत है, जिसकी निगरानी या तो सुप्रीम कोर्ट करे या फिर वह किसी पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की देखरेख में हो। भाजपा हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती। दोषियों को कड़ी सजा मिले।
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HC के जज से जांच कराने की उठाई मांग
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने राम मंदिर चंदा विवाद पर कहा कि महंत नृत्य गोपाल दास ने लगभग बीस दिनों के बाद, जब मंदिर में कथित चोरी का मामला सामने आया और पूरा देश इसके बारे में जान गया, तब जाकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्हें तत्काल इस मामले पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी और यह मांग करनी चाहिए थी कि राम मंदिर ट्रस्ट में हुई कथित चोरी की जांच किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए, जिससे असली दोषी को जनता के सामने लाया जा सकें।
