राम मंदिर दान चोरी विवाद: SIT जांच के बीच ट्रस्ट की बैठक; गोपाल राव के मीटिंग में शामिल होने पर लगी रोक
Ram Temple Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में ट्रस्ट की अहम बैठक जारी है। बैठक में गोपाल राव, चंपत राय और अनिल मिश्र को बुलाने पर आने की बाद कही गई है जो पहले ही तय किया गया था।
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
राम मंदिर दान विवाद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Trust Meeting On Ram Temple Donation Theft Case: अयोध्या के श्री राम मंदिर में दान चोरी को लेकर जांच प्रक्रिया जोरो पर है। इस बीच राम मंदिर परिसर में ट्रस्ट कार्यकारिणी की एक अहम बैठक भी आयोजित की गई है जिसकी अध्यक्षता महंत नृत्य गोपाल दास कर रहे है।
सूत्रों के मुताबिक इस अहम बैठक में चंपत राय और डॉ.अनिल मिश्र का इस्तीफा स्वीकार किया जा चुका है। ज्यादातर ट्रस्टियों ने अपना मत देते हुए आरोपियों पर कार्रवाई जरूरी बताया। ट्रस्टियों ने कहा कि आरोपियों के कारण राम मंदिर और सनातन परंपरा की छवि प्रभावित हुई है।
एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट भी देखी गई
जानकारी के मुताबिक इस अहम बैठक के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरी ने श्री राम मंदिर में दान चोरी मामलें की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतरिम रिपोर्ट भी सभी सदस्यों को देखने के लिए एक-एक प्रतिलिपि दी।
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बैठक में गोपाल राव के शामिल होने पर लगी रोक
बताया जा रहा है कि राम मंदिर परिसर में ट्रस्ट कार्यकारिणी बैठक में गोपाल राव भी शामिल होने के लिए पहुंचे थे। लेकिन उन्हें बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया। क्योंकि यह पहले से ही तय कर दिया था कि तीनों आरोपी पदाधिकारियों चंपत राय, डॉ.अनिल मिश्र और गोपाल मिश्र को जरूरत पड़ने पर बुलाया जाएगा। साथ ही यह भी पहले तय किया गया था कि बैठक का एजेंडा तीनों आरोपी पदाधिकारियों की गैर मौजूदगी में ही रखा जाएगा।
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दो तिहाई बहुमत से हटाए सकते है ट्रस्टी
नियम के अनुसार कोई ट्रस्टी अगर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करता है तो उसे दो तिहाई बहुमत से हटाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए पहले कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य होगा है। इतना ही नहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नए सदस्य को शमिल करने के लिए या हटाने के मुख्य नियम ट्रस्ट डीड के प्रावधानों पर आधारित होता हैं। ट्रस्ट में नए सदस्यो को शामिल करने का भी प्रावधान तय है जिसका निर्णय ट्रस्ट बोर्ड को ही लेना होगा।
