Ram Mandir Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पर उठे गंभीर सवाल
Ram Mandir Theft: अयोध्या के राम मंदिर में 80 लाख रुपये के चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की भूमिका पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
राम मंदिर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Ram Mandir Theft Donation Scam Updates: अयोध्या के राम मंदिर में एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में इस गंभीर विषय पर कई बड़े खुलासे हुए हैं और भारी बवाल मचा है। मंदिर में चढ़े दान की रकम से लगभग 80 लाख रुपये का गबन हुआ है जिसकी अब जाकर गुपचुप तरीके से रिकवरी हुई है। चंदा चोरी का सच सामने आने के बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की जिम्मेदारी और भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वरिष्ठ वकील के. परासरन ने साफ कहा कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार अगर किसी ने इस्तीफा दिया है तो वह मंजूर होना चाहिए। 28 जून को गोविंद देव गिरी ने पत्र जारी कर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की बहुत बड़ी जानकारी दी थी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि 28 जून से 6 जुलाई तक चंपत राय किस हैसियत से इस बड़े ट्रस्ट में अपने पद पर बने रहे। नैतिकता के आधार पर अगर कोष से चोरी हुई है तो कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी इससे बिल्कुल भी नहीं बच सकते हैं।
गोपाल राव को पद से हटाया गया
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर काम कर रहे गोपाल राव को भी ट्रस्ट की बैठक के बाद हटा दिया गया है। गोपाल राव पर मंदिर की व्यवस्था संभालने की बड़ी जिम्मेदारी थी लेकिन उन्हें हटाने का असली कारण अब तक नहीं बताया गया है। अगर कोषाध्यक्ष रहते हुए वित्तीय मामलों में अनिल मिश्रा की बहुत अधिक दखल थी तो गोविंद देव गिरी ने इसे पहले क्यों छिपाया।
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चंपत राय ने पुलिस से बात छिपाई
5 जून को महासचिव चंपत राय ने एक कर्मी की अचानक तलाशी कराई थी जिसके पास और बाथरूम से भारी नकदी बरामद हुई थी। इसके बाद ट्रस्ट ने इस गंभीर मामले की जानकारी पुलिस को देने के बजाय मामले को दबाने के लिए अपनी आंतरिक जांच शुरू करा दी। मीडिया में उस तारीख का सीसीटीवी फुटेज मौजूद है जिसमें चंदे की रकम की यह बड़ी और हैरान करने वाली चोरी पकड़ी गई थी।
अखिलेश और पवन पांडेय के आरोप
7 जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X पर पोस्ट डालकर राम मंदिर के दानपात्र से चोरी का आरोप लगाया। सपा के ही स्थानीय नेता पवन पांडेय ने प्रेसवार्ता कर कहा कि मंदिर में पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये की भारी चोरी हुई है। लेकिन इसके तुरंत बाद चंपत राय ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और केवल आंतरिक अंकेक्षण की बात कही।
पीएमओ ने लिया मामले का संज्ञान
मामले को बढ़ता देख 9 जून को बीजेपी नेता डा. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बहुत जरूरी पत्र लिखा। उन्होंने इस मामले की सीबीआई या ईडी जैसी स्वतंत्र और बड़ी केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की भारी मांग की। प्रधानमंत्री कार्यालय के संज्ञान लेने के बाद मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र तत्काल अयोध्या पहुंचे और जानकारी जुटाई।
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जिम्मेदारी से बच रहे हैं कोषाध्यक्ष
यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि मंदिर के चंदे की भारी चोरी हो रही थी और यह बात पदाधिकारियों को अच्छी तरह पता थी। इन सबके बावजूद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पूरी तरह से सुरक्षित कैसे हैं, यह राम भक्तों के लिए एक बहुत बड़ा सवाल है। केवल पुणे में बैठकर ट्रस्ट के कोष का काम देखने से वह अपनी इस बड़ी जिम्मेदारी और जवाबदेही से बिल्कुल नहीं बच सकते हैं।
