राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बड़ा सवाल! मनोज कुमार पारस बोले- आखिर चंपत राय कब देंगे जवाब?
Manoj Kumar Paras Statement: राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद पर मनोज कुमार पारस ने ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि चंपत राय इस मामले पर कब बोलेंगे? जानिए पूरी अपडेट।
- Written By: वंदना शर्मा
विधायक मनोज कुमार पारस (सोर्स आईएएनएस)
Ram Mandir Donation Controversy: उत्तर प्रदेश के नगीना विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनोज कुमार पारस ने राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद और अन्य मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मंदिर में कथित चोरी की घटना ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है। इतना ही नही बल्कि उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मनोज कुमार पारस ने मीडिया से क्या कहा
मनोज कुमार पारस ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह केवल चोरी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने सवाल उठाते हुए बोला कि जब भगवान श्रीराम के मंदिर में ऐसी घटना हो सकती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उनके अनुसार, मंदिर की व्यवस्था संभालने वालों को इस मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के रुख का बचाव करते हुए मनोज कुमार पारस ने कहा कि सपा की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। न तो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और न ही अखिलेश यादव ने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध किया। यह पूरा मामला न्यायालय के निर्णय से जुड़ा था और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद उसका पालन कराना सरकार की जिम्मेदारी थी।
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वहीं, फैसला आने से पहले विवादित स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना तत्कालीन सरकार का संवैधानिक दायित्व था, जिसका पालन किया गया।
स्वयं अनुसूचित समाज से आते हैं: पारस
उन्होंने तो यह तक कह दिया कि राम मंदिर निर्माण आंदोलन में समाज के हर वर्ग ने योगदान दिया था। लेकिन जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ है, तो कई वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। मीडिया से बात करते हुए पारस ने कहा कि वह स्वयं अनुसूचित समाज से आते हैं और दलित व पिछड़े वर्ग के लोगों ने भी राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी, फिर भी ट्रस्ट में इन समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि जब किसी संस्था या संपत्ति की देखरेख के लिए लोगों की नियुक्ति की जाती है तो यह पूरी जिम्मेदारी उन्हीं लोगों की होती है। ऐसे में यदि मंदिर में इस तरह की घटना हुई है तो इसकी जवाबदेही उन लोगों पर भी बनती है, जिन्हें ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया और जिन्हें मंदिर की व्यवस्था संभालने का दायित्व सौंपा गया।
पारस ने भाजपा विपक्ष पर साधा सीधा निशाना
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अब जब मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। हर रोज सोशल मीडिया पर चर्चाएं हो रही हैं, तब भाजपा विपक्ष पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। एसआईटी जांच को लेकर सवाल उठाते हुए पारस ने कहा कि सामान्य प्रक्रिया में पहले प्राथमिकी दर्ज होती है और उसके बाद जांच आगे बढ़ती है।
लेकिन इस मामले में पहले एसआईटी का गठन किया गया और बाद में एफआईआर दर्ज हुई। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रही है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से जारी पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक मनोज कुमार पारस ने कहा कि इस सवाल का जवाब चंपत राय ही दे सकते हैं कि वह इस मामले पर कब बोलेंगे। उन्होंने कहा कि संभव है फिलहाल उन्हें सार्वजनिक बयान देने से रोका गया हो और जांच पूरी होने के बाद तय रणनीति के तहत उनकी प्रतिक्रिया सामने आए।
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इस मुद्दे पर कोई और टिप्पणी करने से किया इनकार
वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के लव मैरिज पर दिए गए बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर मनोज कुमार पारस ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस विषय पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते। उनका कहना था कि संविधान में बालिग होने की उम्र तय है और हर व्यक्ति को उसी संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार निर्णय लेना और उसका पालन करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने इस मुद्दे पर कोई और टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
