भंडारा की महिला का वोटर रिकॉर्ड पहुंचा उत्तर प्रदेश, SIR सत्यापन में गड़बड़ी का आरोप

Bhandara Voter List: भंडारा की महिला मतदाता का रिकॉर्ड विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में मैप होने का मामला सामने आया है।
bhandara woman voter record mapped in uttar pradesh sir error
Voter List Error (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Bhandara Voter Record: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर अभियान के दौरान भंडारा की एक महिला का वोटर रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश में दर्ज होने का मामला सामने आया है। अंसारी वार्ड निवासी फहीम परवीन मोहम्मद इरशाद जमा कुरेशी ने इस संबंध में उपविभागीय अधिकारी एवं मतदाता पंजीकरण अधिकारी, भंडारा को शिकायत देकर जांच और त्रुटि सुधार की मांग की है। पहले दर्ज हो चुका था रिकार्डशिकायत के अनुसार फहीम परवीन वर्ष 2002 से भंडारा विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 61 की मतदाता हैं।

उनका नाम पहले भंडारा नगर परिषद के अंसारी वार्ड वार्ड की मतदाता सूची के भाग क्रमांक 145 में 819 नंबर पर दर्ज था। उन्होंने हाल ही में एसआईआर के तहत मतदान सत्यापन के दौरान भाग क्रमांक 98 के अनुक्रमांक 1314 के तहत मैपिंग किया था। जब उन्होंने मैपिंग प्रक्रिया पूरी करनी चाही, तब मोबाइल स्क्रीन पर संदेश मिला कि उनका रिकॉर्ड पहले ही उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले की सरोजिनी नगर विधानसभा क्षेत्र बूथ क्रमांक 198, द मॉडल पब्लिक इंटर कॉलेज, चिल्लावन, में ईपीक नंबर TXQ3753894 के साथ मैप किया जा चुका है।

भंडारा से फर्रुखाबाद पहुंचा वोटर रिकॉर्ड

फर्रुखाबाद से कोई संबंध नहीं महिला ने शिकायत में बताया कि उनका फर्रुखाबाद से कोई संबंध नहीं है और न ही उनका कोई रिश्तेदार वहां रहता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के संबंधित बीएलओ विशाल कुमार से संपर्क करने पर भी उत्तर प्रदेश में मैपिंग होने की जानकारी मिलने का दावा किया है। उनका कहना है कि इस त्रुटि के कारण भंडारा में उनका मतदाता सत्यापन नहीं हो पा रहा है।

सांसद व कलेक्टर से शिकायत

फहीम परवीन ने सांसद डॉ. प्रशांत पड़ोले, जिलाधिकारी तथा जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी शिकायत की प्रतिलिपि भेजते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने, उत्तर प्रदेश में हुई गलत मैपिंग निरस्त करने तथा भंडारा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में उनका नाम यथावत बनाए रखने की मांग की है। इस घटना ने एसआईआर अभियान के दौरान मतदाता रिकॉर्ड की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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