रागिनी सोनकर और गुलाब देवी, फोटो- सोशल मीडिया
Ragini Sonkar vs Gulab Devi: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र इन दिनों अपनी तीखी बहसों के साथ-साथ दिलचस्प वाकयुद्ध के लिए भी चर्चा में है। मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान सपा की युवा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी के बीच शायराना अंदाज में तीखी नोकझोंक हुई, जिसने सदन के माहौल को गरमा दिया।
“रामचंद्र कह गए सिया से…” रागिनी का सत्ता पर प्रहार सदन में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की कमी का मुद्दा बेहद अनोखे अंदाज में उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल दागते हुए पुरानी भजन की पंक्तियों को नए राजनीतिक संदर्भ में पेश किया।
रागिनी ने कहा, “रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा, मेरे नाम से सत्ता पाकर सबको आंख दिखाएगा। धर्मों पर लड़वाएगा और जाति पर बंटवाएगा, गरीबों की शिक्षा को रौंदा जाएगा।” इस शायरी के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि सरकार धर्म के नाम पर तो राजनीति कर रही है, लेकिन शिक्षा के बुनियादी ढांचे की ओर उसका ध्यान नहीं है।
शायरी के बाद डॉ. सोनकर ने तर्कों के साथ अपनी विधानसभा क्षेत्र ‘मछलीशहर’ के स्कूलों का उदाहरण पेश किया। उन्होंने दावा किया कि मछलीशहर और आसपास के कई राजकीय कॉलेजों में विज्ञान के शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं। उन्होंने अनुच्छेद 51 (ए) का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब स्कूलों में विज्ञान के शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों में वैज्ञानिक सोच कैसे विकसित होगी?
शायरी बनाम शायरी। आज सदन में सपा विधायक रागिनी सोनकर ने राज्य में इंटर कॉलेज के अंदर विज्ञान की पढ़ाई नहीं होने का सवाल उठाया। टीचर, प्रधानाचार्य और ग्रुप डी कर्मचारियों के खाली पद का मुद्दा उठाया। शुरुआत में शायरी के जरिए घेरा। pic.twitter.com/yTdfIq0vRe — Rajesh Sahu (@askrajeshsahu) February 17, 2026
रागिनी सोनकर ने चुटकी लेते हुए कहा कि भगवान राम को भी शिक्षा के लिए गुरु वशिष्ठ मिले थे, लेकिन आज की सरकार रामराज की बात तो करती है, पर बच्चों को शिक्षक नहीं दे पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 के बाद से कई कॉलेजों में प्रधानाचार्य और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं।
विपक्ष के इन तीखे प्रहारों का जवाब देने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी सदन में खड़ी हुईं और उन्होंने भी जवाब के लिए शायरी का ही सहारा लिया। उन्होंने रागिनी पर पलटवार करते हुए कहा, “सूर्य की किरणें कितनी भी चमचमाएं, लेकिन समुद्र की लहरों को सुखा नहीं सकती हैं।” मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहे कितना भी शोर मचा ले, लेकिन सरकार द्वारा किए गए कार्यों की सच्चाई को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यह अच्छी बात है कि आज विपक्ष को भगवान राम का उदाहरण देना पड़ रहा है।
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जवाब के लिए माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी खड़ी हुई। दो शायरी दाग दी, इसके बाद जवाब देना शुरू किया। जवाब सुन लीजिए। pic.twitter.com/oIp9wurtyW — Rajesh Sahu (@askrajeshsahu) February 17, 2026
मंत्री गुलाब देवी ने केवल शायरी ही नहीं की, बल्कि आंकड़ों के जरिए विपक्ष के आरोपों को खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश के 974 राजकीय कॉलेजों में से केवल तीन को छोड़कर सभी में विज्ञान वर्ग के शिक्षकों के पद सृजित हैं। उन्होंने अनुदानित कॉलेजों में भी नियुक्तियों की प्रक्रिया और सरकार के विजन को सदन के सामने रखा। हालांकि इस शायराना नोकझोंक ने सदन का तनाव कुछ कम किया लेकिन शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा की गुणवत्ता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।