इलाहाबाद हाईकोर्ट, फोटो- सोशल मीडिया
Bareilly DM SSP Contempt Notice: उत्तर प्रदेश के बरेली में एक निजी घर के भीतर सामूहिक नमाज रुकवाना जिला प्रशासन को भारी पड़ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में बरेली के जिलाधिकारी और एसएसपी अनुराग आर्य को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजी परिसर में प्रार्थना के लिए किसी सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आज यानी 17 फरवरी 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार कोर्ट ने बरेली के डीएम और एसएसपी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी किया है।
यह पूरा मामला बरेली के मोहम्मदगंज गांव में 16 जनवरी 2026 को हुई एक घटना से जुड़ा है। वहां रेशमा खान नामक महिला के निजी घर में कुछ लोग इकट्ठा होकर सामूहिक नमाज पढ़ रहे थे। स्थानीय हिंदू परिवारों की शिकायत के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नमाज रुकवा दी थी, जिसे अब कोर्ट ने व्यक्ति के निजी अधिकारों का हनन माना है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने निजी परिसर में कोई धार्मिक गतिविधि कर रहा है, तो उसे रोकना कोर्ट के पिछले स्पष्ट आदेशों की अवहेलना है।
हाईकोर्ट ने हाल ही में क्रिश्चियन समूहों से जुड़े एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि निजी स्थानों पर प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए शासन या प्रशासन से किसी भी प्रकार की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यही कानूनी स्थिति और नियम नमाज के मामले में भी पूरी तरह लागू होते हैं।
अधिकारियों से जवाब तलब और अवमानना की कार्यवाही डिवीजन बेंच ने ‘मरानाथ फुल गास्पेल मिनिस्ट्रीज’ और ‘इम्मानुएल ग्रेस चैरिटेबल ट्रस्ट’ की याचिकाओं पर दिए गए पूर्व आदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि बरेली प्रशासन ने इन स्थापित कानूनी स्थितियों को नजरअंदाज किया है। इसी के चलते 12 फरवरी को कोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्णय लिया।
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प्रशासन से पूछा गया है कि अदालती निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही क्यों न की जाए। कोर्ट ने बरेली पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि वे इस मामले के याचिकाकर्ता तारिक खान के खिलाफ फिलहाल कोई भी दवाब वाली या दंडात्मक कार्रवाई न करें।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च 2026 की तारीख तय की है। उस दिन बरेली के पुलिस और प्रशासनिक मुखिया को अपना पक्ष रखना होगा कि उन्होंने स्थापित नियमों के विरुद्ध जाकर निजी परिसर में धार्मिक आयोजन को क्यों रुकवाया। यह मामला न केवल बरेली बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता और निजी संपत्ति के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।