पर्यावरण संरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त: 100 साल पुराने बरगद को काटने पर लगाई रोक; कहा- धरोहर को नहीं हटाया जा सकता
Allahabad High Court: हाईकोर्ट ने कानपुर के हंसपुरम स्थित करीब 100 साल पुराने बरगद के पेड़ को हटाने पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि ऐसे पुराने वृक्ष प्राकृतिक धरोहर को बिना ठोस कारण हटाया नहीं जा सकता।
- Reported By: ओमप्रकाश सिंह परिहार | Edited By: स्निग्धा श्रीवास्तव
हाईकोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Allahabad High Court Order On 100 Year Old Banyan Tree: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के हंसपुरम क्षेत्र में स्थित करीब 100 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ को हटाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि इस उम्र का बरगद का पेड़ केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि प्राकृतिक धरोहर है, जिसे बिना ठोस कारण हटाया नहीं जा सकता। अदालत ने अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 तक पेड़ को हटाने अथवा दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया आदेश
यह आदेश न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता द्वारा 20 जून 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें हंसपुरम योजना संख्या-6, सेक्टर-1ए, प्लॉट संख्या-2339 पर स्थित बरगद के पेड़ को हटाकर दूसरी जगह लगाने की मंजूरी दी गई थी।
वन विभाग ने 27 मई 2026 को पेड़ हटाने की अनुमति दी थी
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि वन विभाग ने 27 मई 2026 को पेड़ हटाने की अनुमति दी थी। हालांकि रिकॉर्ड और प्रस्तुत तस्वीरों के आधार पर हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित बरगद का पेड़ लगभग 100 वर्ष पुराना है। अदालत ने कहा कि इतने पुराने वृक्ष दुर्लभ श्रेणी में आते हैं और पर्यावरणीय दृष्टि से अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे पेड़ों को संरक्षित किया जाना सार्वजनिक हित में है।
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तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जिला वन अधिकारी, अधिशासी अभियंता तथा कानपुर विकास प्राधिकरण सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक पेड़ को न तो काटा जाएगा और न ही दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से हाईकोर्ट का यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम मिसाल साबित हो सकता है।
