‘जिस संत की आंखें नहीं, सोचिए उनके कितने पाप होंगे’, चंद्रशेखर आजाद ने रामभद्राचार्य पर की टिप्पणी
‘जिस संत की आंखें नहीं, सोचिए उनके कितने पाप होंगे’, नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर बेहद कड़े शब्दों में निशाना साधा है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
चंद्रशेखर आजाद ने रामभद्राचार्य पर की टिप्पणी, फोटो- सोशल मीडिया
Chandrashekhar Azad Statement on Rambhadracharya: ‘जिस संत की आंखें नहीं, सोचिए उनके कितने पाप होंगे’, नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर उनकी आंखों को लेकर टिप्पणी की है। चंद्रशेखर ने कहा कि एक संत मेरठ में कथा के दौरान कह रहे हैं कि वे मिनी पाकिस्तान में आ गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति खुद कहते हैं कि बचपन से उन्हें दिखाई नहीं देता, वे कैसे ऐसी बातें कर सकते हैं।
चंद्रशेखर यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा, “जिस संत की आंखें नहीं हैं, सोचिए उसने कितने पाप किए होंगे। और आज जनता को उन्हीं से ज्ञान लेना पड़ रहा है।” इसके साथ ही चंद्रशेखर ने कई और मुद्दों पर अपनी बात रखी।
मेरठ वाले बयान पर चंद्रशेखर का पलटवार
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मेरठ में कथा कर रहे एक कथावाचक खुद को संत कहते हैं और मंच से कहते हैं कि वे मिनी पाकिस्तान में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान नफरत फैलाने वाला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले तो उन्हें दिखता नहीं है, और फिर भी वे इस तरह की भाषा बोलते हैं। ऐसे लोग समाज में ज़हर घोलने का काम कर रहे हैं।
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संत की न कोई जाति, न धर्म
सांसद ने कहा कि संत वह होता है जो जोड़ने का काम करता है, न कि तोड़ने का। उन्होंने कहा कि एक सच्चे संत की न कोई जाति होती है और न ही कोई धर्म। लेकिन आज कुछ लोग धर्म और जाति के नाम पर समाज में नफरत फैला रहे हैं। चंद्रशेखर ने कहा कि लोगों को इनसे सावधान रहना चाहिए।
सरकार पर भी बोला हमला
बरेली के संजय कम्युनिटी हॉल में प्रबुद्धजन सम्मेलन को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों को घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विकास के रास्ते पर नहीं, बल्कि विनाश की ओर जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर वर्ग के अधिकार छीने जा रहे हैं और जनता का सरकार से भरोसा उठता जा रहा है।
जातिगत जनगणना और मंडल आयोग पर बोले चंद्रशेखर
चंद्रशेखर ने मांग की कि जातिगत जनगणना में आर्थिक गणना भी शामिल की जाए। उन्होंने कहा कि 1931 के बाद से अब तक कोई संपूर्ण जातिगत जनगणना नहीं हुई है। मंडल आयोग की सिफारिशें आज तक पूरी तरह लागू नहीं की गई हैं, जबकि यह जरूरी है कि हर वर्ग को उसका हक मिले।
संविधान पर खतरे का किया दावा
उन्होंने कहा कि देश के संविधान पर खतरा मंडरा रहा है। सरकारी विभागों को निजी हाथों में बेचा जा रहा है और सरकारी नौकरियों की संख्या घटती जा रही है। चंद्रशेखर ने कहा कि लोकतंत्र में हमें जो अधिकार बाबा साहब ने दिए, उन्हें बचाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटियों को बेटों के बराबर मौका मिलना चाहिए क्योंकि बेटियां पढ़ेंगी तो तीन पीढ़ियां सुधरेंगी।
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ईवीएम पर सवाल, बैलेट पेपर की मांग
चंद्रशेखर ने चुनाव प्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईवीएम पर जनता का भरोसा कम हो गया है और अब चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और जनता का विश्वास बहाल होगा।
