

CCSU Russian Cultural Program Meerut: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय0में आयोजित कार्यक्रम के तीसरे दिन रूसी लोक-संस्कृति, संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने वातावरण को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में रूस की लोक परंपराओं, मातृभूमि के प्रति प्रेम, प्रकृति, ग्रामीण जीवन, हास्य और पारंपरिक नृत्य-संगीत की विविध झलकियां देखने को मिलीं। कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित एवं आकर्षक ढंग से किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, विद्यार्थियों तथा अन्य अतिथियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘युवतियां और शरारती युवक’ प्रस्तुति से हुई। हास्य, चंचलता और युवा भावनाओं से भरपूर इस प्रस्तुति ने दर्शकों का मनोरंजन किया तथा रूसी लोक-संस्कृति की जीवंतता को सामने रखा। इसके बाद ‘मां रूस’ की प्रस्तुति हुई। इसमें अपनी मातृभूमि, अपनी धरती और अपनी जड़ों के प्रति प्रेम एवं सम्मान की भावना को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया।
इसके पश्चात ‘स्वर्णिम गुंबदों वाला मॉस्को’ ने रूस की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से दर्शकों को परिचित कराया। कार्यक्रम में ‘हास्यपूर्ण’ प्रस्तुति ने हास्य और मनोरंजन का रंग भरा। इसके बाद ‘रूसी जूते’ के माध्यम से पारंपरिक रूसी पहनावे, लोकनृत्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की सुंदरता प्रस्तुत की गई। ‘मैं रूस के ऊपर उड़ रहा हूं’ ने रूस की विशाल धरती, प्राकृतिक सौंदर्य और विविध भू-दृश्यों की कल्पनात्मक यात्रा कराई।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण लोकप्रिय रूसी लोकधुन ‘कालिंका’ रही। तेज लय, आकर्षक धुन और उत्साहपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इसके बाद ‘मैं तुमसे प्रेम करता हूं, रूस’ की प्रस्तुति ने मातृभूमि के प्रति प्रेम, गर्व और भावनात्मक जुड़ाव को अभिव्यक्त किया। दूसरे खंड में ‘बारिन्या’ से शुरुआत हुई। यह प्रसिद्ध रूसी लोकनृत्य शैली तेज लय, ऊर्जावान कदमों और पारंपरिक लोक-अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है।
इसके बाद ‘वोल्गा नदी के नीचे की ओर’ के माध्यम से रूस की महत्वपूर्ण नदी वोल्गा और उससे जुड़े लोकजीवन एवं सांस्कृतिक स्मृतियों की झलक प्रस्तुत की गई। ‘और मैं घास के मैदान में’ ने रूसी ग्रामीण जीवन, खुले मैदान और प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध को दर्शाया। ‘चौड़ी खिड़की के नीचे’ के माध्यम से पारंपरिक रूसी घर, ग्रामीण परिवेश, परिवार और मानवीय संबंधों से जुड़ी भावनाओं को प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद ‘युवतियों का पारंपरिक नृत्य’ प्रस्तुत किया गया, जिसमें सामूहिकता, तालमेल और रूसी लोकनृत्य की सुंदरता दिखाई दी। ‘मेरी खुशी जीवित है’ ने प्रेम, लगाव और मानवीय संवेदनाओं को संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुतियों में ‘हमारी धरती, रूस’ ने अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम, अपनत्व और गर्व की भावना को प्रभावशाली रूप से सामने रखा।
इस अवसर पर प्रोफेसर बीरपाल सिंह, मुख्य अनुशासक एवं निदेशक अकादमिक ने कहा कि इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने विद्यार्थियों और उपस्थित अतिथियों को रूसी लोक-संस्कृति, संगीत, नृत्य और लोक परंपराओं को समझने का अवसर प्रदान किया।
प्रस्तुतियों में रूस की संस्कृति के विविध रंग-मातृभूमि के प्रति प्रेम, प्रकृति से जुड़ाव, लोकजीवन, हास्य, उल्लास तथा पारंपरिक संगीत और नृत्य-अत्यंत सुंदर ढंग से दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विभिन्न देशों की सभ्यता और संस्कृति को समझने तथा उनके प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों, कलाकारों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों को बधाई दी।
डीएसपी मेरठ संग्राम सिंह ने कहा कि कार्यक्रम में रूसी लोक-संस्कृति की विविधता और जीवंतता को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। रूसी लोकगीतों और नृत्यों की ऊर्जा, सामूहिकता तथा अपनी परंपराओं और मातृभूमि के प्रति जुड़ाव ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस दोनों ही समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को विभिन्न संस्कृतियों को समझने और उनका सम्मान करने का अवसर प्रदान करते हैं तथा आपसी सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम में सीओ दीक्षा बोरिया, मेडिकल लाइंस मेरठ, सीओ संग्राम सिंह, प्रोफेसर बीरपाल सिंह, मुख्य अनुशासक एवं निदेशक अकादमिक, प्रोफेसर वीरेंद्र बरनवाल, प्रोफेसर भूपेंद्र, प्रोफेसर अलका, प्रोफेसर जितेंद्र सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीतीश द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत रूसी लोकगीतों और नृत्यों ने दर्शकों को रूस की सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने के साथ-साथ यह संदेश भी दिया कि संगीत, नृत्य और लोक-संस्कृति भाषाई सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। तीसरे दिन आयोजित कार्यक्रम की सभी प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों ने सराहा और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।