

भाई-बहन के एक साथ यमुना स्नान का विशेष महत्व
माथुर चतुर्वेद परिषद ने संभाली व्यवस्थाएं
यमुना महारानी को वस्त्र और शृंगार सामग्री अर्पित की जाती हैं
Special Religious Significance Vishram Ghat Mathura: धर्मनगरी मथुरा में यम द्वितीया के पावन पर्व पर होने वाले परंपरागत यमुना स्नान को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। भाई-बहन के अटूट प्रेम और पवित्र रिश्ते का प्रतीक यह पर्व मथुरा के विश्राम घाट पर विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां बहन अपने भाई का हाथ पकड़कर यमुना में स्नान करती है।
धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से भाई-बहन को यमराज की फांस से मुक्ति मिलती है।इसी आस्था के चलते देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु मथुरा पहुंचते हैं। यम द्वितीया के मुख्य स्नान को देखते हुए जिला प्रशासन, मथुरा-वृंदावन नगर निगम, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और माथुर चतुर्वेद परिषद ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।
यम द्वितीया के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए नगर निगम ने यमुना के दोनों ओर स्थित घाटों पर विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, महिला श्रद्धालुओं के कपड़े बदलने के लिए टेंट और खोया-पाया केंद्र बनाए गए हैं। मेला क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने के लिए सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
नगर निगम की टीमें घाटों और आसपास के क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था पर लगातार नजर रखेंगी। भीड़ के दबाव को कम करने के लिए यमुना पार क्षेत्र के घाटों पर भी स्नान की व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर एकत्रित न होना पड़े।
जिलाधिकारी और नगर आयुक्त सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर कार्ययोजना तैयार की है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद भी आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं में सहयोग कर रही है। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को स्नान, पूजा-अर्चना और आवागमन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मथुरा के यम द्वितीया स्नान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां विश्राम घाट पर यमुना महारानी और धर्मराज यमराज के मंदिर एक साथ विराजमान हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार दुनिया में विश्राम घाट ही ऐसा विशेष तीर्थस्थल है, जहां भाई-बहन के एक साथ यमुना स्नान की परंपरा का विशेष महत्व है।
इस दिन बहन अपने भाई का हाथ पकड़कर यमुना में डुबकी लगाती है और उसके दीर्घायु तथा सुख-समृद्धि की कामना करती है। स्नान के बाद दोनों यमुना महारानी और धर्मराज के मंदिर में दर्शन-पूजन करते हैं। यमुना महारानी को वस्त्र और शृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद बहन भाई के माथे पर मंगल तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है, जबकि भाई बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपना स्नेह प्रकट करता है।
यम द्वितीया पर्व के पीछे एक प्राचीन धार्मिक कथा प्रचलित है। मान्यता है कि सूर्यदेव की पुत्री यमुना अपने उद्गम स्थल हिमालय से नदी के रूप में प्रवाहित होती हुई मथुरा पहुंचीं और यहां विश्राम किया। इसी स्थान पर उनके ज्येष्ठ भ्राता सूर्यपुत्र यमराज उनसे मिलने आए।
भाई को देखकर यमुना महारानी अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने अपने भाई का विशेष सत्कार किया। यमुना ने यमराज के माथे पर मंगल तिलक लगाया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया।
बहन के इस स्नेह और सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। इस पर यमुना महारानी ने वर मांगा कि जिस स्थान पर भाई-बहन का मिलन हुआ है, वहां जो भी भाई अपनी बहन के साथ उनके जल में स्नान करेगा, उसे यमलोक के कष्टों और यमराज की फांस से मुक्ति मिले।
प्रतिवर्ष यम द्वितीया पर भाई-बहन मथुरा के विश्राम घाट पहुंचकर यमुना में एक साथ स्नान करते हैं। इस दिन यमुना के लगभग 25 घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। हालांकि विश्राम घाट के स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पर्व की पूर्व संध्या पर भी श्रद्धालु यमुना में आंशिक रूप से स्नान और दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।
यम द्वितीया का यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों की गहराई का भी प्रतीक है। मथुरा की इस अनूठी परंपरा के कारण यम द्वितीया पर विश्राम घाट देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है।