यूपी में अब तेंदुओं की होगी नसबंदी, क्यों योगी सरकार को 650 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे?

UP Government News: 650 करोड़ रुपए के इस प्रस्ताव के पहले चरण में बिजनौर में तेंदुओं की नसबंदी कर उनकी संख्या को बढ़ने से रोका जाएगा। यह जिला तेंदुओं के हमलों से सबसे अधिक प्रभावित है।
Leopards will now be sterilized in UP, why will the Yogi government have to spend Rs 650 crore?
सीएम योगी और तेंदुआ।
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UP Leopards News: उत्तर प्रदेश में बस्तियों में भेड़िए और तेंदुओं के आने की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं। इनके हमलों से हर साल जनहानि हो रही है। बहराइच जिले में भेड़ियों ने कई लोगों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बनाया है। बिजनौर में 2023 से सितंबर 2025 तक तेंदुओं के हमलों की 90 घटनाएं हुईं। इनमें 35 लोगों की जान गई। 50 से अधिक लोग घायल हुए।

अब वन विभाग ने तेंदुओं की नसबंदी करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। 650 करोड़ रुपए के इस प्रस्ताव के पहले चरण में बिजनौर जिले में तेंदुओं की नसबंदी की जाएगी, ताकि इनकी संख्या बढ़ने से रोकी जाए। इसके अलावा प्रस्ताव के तहत बाघ और तेंदुओं के लिए संवेदनशील गांवों में सीसीटीवी, हैलोजन लाइट लगाई जाएगी। इन वन्यजीवों से लोगों को बचाने के प्रबंध किए जाएंगे।

इंसानों पर लगातार हो रहे तेंदुओं के हमले

तेंदुओं की नसबंदी करने के इस प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण सक्सेना से समक्ष हुआ है। इसके बाद प्रस्ताव को सरकार को भेजने पर सहमति बनी। यूपी के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी का कहना है कि सरकार की अनुमति मिलने के बाद इस प्रस्ताव पर अमल किया जाएगा। वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश में तेंदुओं की संख्या में इजाफा होने से आए दिन लोगों के साथ तेंदुओं के संघर्ष घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने राज्य में तेंदुओं द्वारा लोगों पर किए गए हमलों का ब्यौरा जुटाया।

तेंदुओं के हमलों में कहां हुईं सबसे अधिक मौतें?

तेंदुओं के हमलों से सबसे अधिक मौतें बिजनौर जिले में हुई। 2023 से सितंबर 2025 तक जिले में तेंदुओं के हमले की 90 घटनाएं हुईं। इनमें 35 लोगों की मौत हुई। 55 लोग घायल हैं। इन जिले में तेंदुओं के हमले के लिहाज से 444 गांवों को संवेदनशील मानकर नजीबाबाद, नगीना और चांदपुर रेंज को हॉटस्पॉट कहा गया।

बिजनौर में तेंदुओं के हमले सबसे अधिक क्यों?

एक अध्ययन में पाया गया है कि इस जिले में गन्ने के खेत तेंदुओं के छिपाने और शिकार करने करने के लिए सबसे मुफीद स्थल बन गए हैं। बिजनौर में 40 से अधिक तेंदुए हैं। उत्तराखंड के राजाजी और कार्बेट नेशनल पार्क में बाघों और तेंदुओं की संख्या बढ़ रही।

हर साल तेंदुओं की संख्या 15% बढ़ रही

2022 को हुई गणना के अनुसार यूपी में 371 तेंदुआ और 222 बाघ थे। वन अधिकारियों का कहना है कि राज्य में चल रहे टाइगर (बाघ) प्रोजेक्ट के चलते बाघ और तेंदुओं की संख्या हर साल 15 प्रतिशत बढ़ रही है। इस तरह से अगले पांच वर्षों में तेंदुओं की संख्या 600 से अधिक होगी। तेंदुओं का लोगों पर हमला भी बढ़ेगा। इस कारण से तेंदुओं की संख्या रोकने के लिए उनकी नसबंदी करने का प्रस्ताव तैयार किया गया।

कैसे होगी नसबंदी?

लेप्रोस्कोपी विधि से तेंदुओं की नसबंदी करने पर सहमति बनी है। अधिकारियों के मुताबिक इससे तेंदुओं को नुकसान नहीं होगा। यह कहा जा रहा कि तेंदुओं को पकड़ने के बाद उनका मेडिकल टेस्ट होगा। उसके बाद उनकी लेप्रोस्कोपी विधि से नसबंदी की जाएगी। कुछ दिन उन्हें निगरानी में रखने के बाद उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा। अभी लोगों पर हमला करने वाले तेंदुओं को पकड़कर कुछ दिन चिड़ियाघर में रखकर जंगल में छोड़ दिया जाता है। राज्य के चिड़ियाघरों में पकड़े गए तेंदुओं को रखने की जगह नहीं बची है, जिस कारण भी उनकी नसबंदी करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

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