धनंजय सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
Dhananjay Singh Firing Case 2002: वाराणसी के एमपी-एमएलए कोर्ट में 24 साल पुराने चर्चित फायरिंग मामले में अब फैसला आने वाला है। पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर हुए जानलेवा हमले के इस मामले में कोर्ट ने 15 अप्रैल को निर्णय सुनाने की तारीख तय की है। साल 2002 में हुए इस हमले ने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और अब इतने लंबे इंतजार के बाद इस पर अंतिम फैसला आने जा रहा है।
दरअसल, इस मामले में मुख्य आरोपी अभय सिंह को बनाया गया था। साथ ही उनके अलावा करीब सात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई थी, हालांकि बाद में इसी मामले में कुछ लोगों को बरी कर दिया गया था।
सोमवार को इस मामले में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई। अभियोजन, बचाव पक्ष और वादी तीनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें कोर्ट के सामने रखीं। इसके साथ ही सभी पक्षों ने लिखित बहस और संबंधित कानूनी दस्तावेज भी जमा कर दिए हैं। धनंजय सिंह के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी के अनुसार, यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की गई है। उन्होंने धारा 307 के तहत आजीवन कारावास की सजा देने की अपील की है।
यह घटना 4 अक्टूबर 2002 की है, जब उत्तर प्रदेश के वाराणसी के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास धनंजय सिंह पर हमला किया गया था। उस समय वह अपने साथियों के साथ अस्पताल से जौनपुर लौट रहे थे। शाम करीब 6 बजे घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उनके काफिले पर एके-47 और अन्य ऑटोमेटिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में धनंजय सिंह के हाथ में गोली लगी थी, जबकि उनके गनर और अन्य सहयोगी भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
यह भी पढ़ें: 10 घंटे काम…बोनस के नाम पर सिर्फ 900, कितनी मुश्किलों में काम कर रहे हैं कर्मचारी? महिला ने बताई असलियत
इस मामले में अभय सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था। इसके अलावा एमएलसी विनीत सिंह समेत करीब सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि, बाद में साक्ष्यों के अभाव में विनीत सिंह सहित चार आरोपियों को बरी कर दिया गया। अब इस लंबे समय से लंबित मामले में अदालत का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है और सभी की निगाहें 15 अप्रैल पर टिकी हुई हैं।