सीएम योगी का बुलडोजर बिना गरजे ही लौटा, ऐसा क्या हो गया ग्रेटर नोएडा में? प्रशासन ठंडा पड़ गया

Greater Noida Authority: गौतमबुद्ध नगर में अवैध निर्माण और कब्जा पर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। इसी बीच बुलडोजर कार्रवाई करने पहुंची ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम को बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा।
CM Yogi bulldozer returns without taking any action in Greater Noida
सीएम योगी और बुलडोजर।
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Bulldozer Action: योगी सरकार की सख्ती के बाद उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा के बादलपुर के अच्छेजा गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम को ग्रामीणों और भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का भारी विरोध का सामना करना पड़ा।

बुधवार सुबह 6 बजे पुलिस बल और 8 जेसीबी के साथ पहुंची टीम के सामने ग्रामीण दीवार बनकर खड़े हो गए। 2 घंटे चली गहमागहमी और भारी विरोध के बाद प्राधिकरण के दस्ते को बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यहां 15 साल से लोग रह रहे हैं। 95% जमीन पर निर्माण हो गया है। मगर, प्राधिकरण द्वारा चंद खसरा नंबरों को निशाना बनाया जा रहा।

कोर्ट का स्टे होने की जानकारी पर लौटी टीम

कोतवाली प्रभारी अमित भड़ाना ने बताया कि भारी विरोध और विवादित जमीन पर कोर्ट का स्टे होने की जानकारी मिलने के बाद टीम वापस लौट गई। बता दें कि इस कॉलोनी पर पहले भी एक बार कार्रवाई हो चुकी है। दरअसल, ग्रेटर नोएडा में यमुना अथॉरिटी ने यमुना एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के इंटरचेंज के पास स्थित जमीन पर अवैध कब्जे को हटाया। यहां किसानों की 7% आबादी के भूखंडों और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए जमीन आरक्षित हुई थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली में कार्रवाई रोका

इधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के शाहबाद के 27 मकानों के खिलाफ बरेली नगर निगम द्वारा नोटिस के आदेश पर बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने नगर निगम द्वारा मकानों के मालिकों को दिए नोटिस के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता चार हफ्ते के भीतर 9 अक्टूबर 2025 के नोटिस का अपना व्यक्तिगत उत्तर दें।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिकार्ताओं द्वारा जवाब प्रस्तुत किया जाता है तो मामले में प्रतिवादी संख्या चार यानी बरेली नगर निगम द्वारा 9 अक्टूबर 2025 को जारी नोटिस पर मामले का निपटारा एक तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश के माध्यम से दो महीने की अतिरिक्त अवधि के भीतर करेगा और वह याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद।

6 अन्य की याचिकाओं का निस्तारण

अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश के 3 महीने की अवधि तक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिए जाने तक जो पहले हो, नोटिस के अनुसरण में याचिकाकर्ताओं के स्थायी निर्माणों के विरुद्ध कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह आदेश जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस सत्य वीर सिंह की डबल बेंच ने याचिकाकर्ता मोहम्मद शाहिद और 6 अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।

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