‘बसपा अब भाजपा की ‘बी-टीम’ बन गई’, सपा सांसद रामजीलाल सुमन का मायावती पर जोरदार निशाना

BSP चीफ मायावती की ओर से भाजपा की तारीफ करने के बाद सियासत गरमा गई है। सपा नेता और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने मायावती पर तीखा हमला बोला है।
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सपा सांसद रामजीलाल सुमन, फोटो- सोशल मीडिया
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Ramji Lal Suman on Mayawati: मान्यवर कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर कड़ा प्रहार किया और भाजपा की ओर नरम रुख दिखाया। उन्होंने भाजपा की कुछ नीतियों की सराहना करते हुए सपा पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया। उनके इस बयान ने यूपी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।

इस पर सपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मेरा मायावती जी से विनम्र आग्रह है कि समाजवादी पार्टी को कोसने के बजाय उन्हें देश में फैल रही सामंतवादी और सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। आज जरूरत मनुवाद और असमानता के खिलाफ सतत संघर्ष की है।”

रामजीलाल सुमन ने क्या दी दलील?

उन्होंने आगे कहा, “समाजवादी पार्टी को कोसने से बसपा को कोई लाभ नहीं मिलेगा। भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार दलितों पर सबसे अधिक अत्याचार हुए हैं। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और गौतम बुद्ध की मूर्तियों को तोड़ा गया, लेकिन मायावती ने उस पर एक शब्द नहीं कहा। ऐसे में भाजपा की तारीफ करना गलत संदेश देता है।”

बसपा भाजपा की बी-टीम है: सुमन

सुमन ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “आज पूरे देश में यह धारणा बन गई है कि बसपा भाजपा की बी-टीम के रूप में काम कर रही है। मायावती को आत्मचिंतन करना चाहिए कि जब वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, तो यह अवसर कांशीराम जी की तपस्या और जनता की सेवा से मिला था। अगर वह फिर से राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावशाली भूमिका चाहती हैं, तो उन्हें सुविधाभोगी राजनीति छोड़कर संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा।”

रामजी लाल सुमन ने मायावती को दी नसीहत

सपा सांसद ने मायावती को सलाह दी कि वे नकारात्मक राजनीति से बाहर निकलें और समाज के वास्तविक मुद्दों पर बात करें। “उन्हें दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के हितों की लड़ाई को फिर से मजबूत करना चाहिए। अब वक्त है कि वह सकारात्मक दिशा में समाज और लोकतंत्र के पक्ष में खड़ी हों,” उन्होंने कहा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के दिनों में मायावती का भाजपा की ओर झुकाव विपक्षी एकता के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। वहीं सपा इस मुद्दे को 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘दलित वोट बैंक’ की राजनीति से जोड़कर भुनाने की कोशिश में है।

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