भाई ने खोली पोल…तो दिलवाने लगे धमकियां, योगी के लिए नौकरी कुर्बान करने वाले Dy GST कमिश्नर का एक और कारनामा!
UP News: अयोध्या में GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की सच्चाई अब उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह की वजह से पूरी तरह सामने आ गई है। जिसके बाद विश्वजीत ने कहा कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह
प्रशांत कुमार सिंह व इनसेट में विश्वजीत सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
Uttar Pradesh News: अयोध्या में GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की सच्चाई अब उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह की वजह से पूरी तरह सामने आ गई है। इस्तीफा देने के बाद प्रशांत सिंह की असली सच्चाई दुनिया के सामने लाने वाले डॉ. विश्वजीत सिंह को लगातार धमकियां मिल रही हैं।
धमकियां मिलने को लेकर डॉ. विश्वजीत ने कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। जिसे जो करना है वो कर ले लेकिन वह किसी दिव्यांग को उसके अधिकारों से वंचित नहीं होने देंगे। यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। दूसरी तरफ डॉ. विश्वजीत पर ईर्ष्या के तहत ऐसा करने का आरोप भी लगाया जा रहा है।
परिवार से विश्वजीत का बोलचाल बंद
डॉ. विश्वजीत सिंह का कहना है कि जब से शिकायत दर्ज हुई है, तब से न सिर्फ प्रशांत कुमार सिंह से, बल्कि उनकी छोटी बहन जया सिंह से भी बातचीत पूरी तरह बंद हो गई है। जया सिंह अभी कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं और इस मामले में उनकी भी जांच चल रही है। विश्वजीत सिंह का कहना है कि सच सामने लाने की कीमत उन्हें टूटे हुए पारिवारिक रिश्तों के रूप में चुकानी पड़ी है।
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भाई-बहन ने बनवाए फर्जी सर्टिफिकेट
डॉ. विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत कुमार सिंह और उनकी बहन जया सिंह ने अलग-अलग सालों में एक ही डॉक्टर से दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाया था। उनका आरोप है कि प्रशांत कुमार सिंह ने 2009 में और जया सिंह ने 2012 में दोनों ने एक ही डॉक्टर से दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनवाया था।
भाई ने जांच एजेंसियों को सौंपे सुबूत
आरोप है कि दोनों सर्टिफिकेट फर्जी हैं और सरकारी नौकरी में फायदे उठाने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया था। विश्वजीत का दावा है कि उनके पास सभी सबूत हैं, जो उन्होंने जांच एजेंसियों को सौंप दिए हैं। इसके बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की गई।
13 अक्टूबर को की गई शिकायत
डॉ. विश्वजीत सिंह के अनुसार, इस मामले में औपचारिक प्रक्रिया 13 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई, जब दिव्यांग व्यक्तियों के लिए राज्य आयुक्त के कार्यालय में शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच करने का निर्देश दिया गया। 19 दिसंबर 2025 को मऊ के CMO ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए मार्गदर्शन मांगा।
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आरोपों के मुताबिक पहले जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। लेकिन जब जांच को रोका नहीं जा सका, तो इस्तीफे का विकल्प चुना गया। उनका दावा है कि प्रशांत सिंह चाहते हैं कि इस्तीफा मंजूर होने के बाद जांच बंद हो जाए और कोई रिकवरी न हो। अब आगे इस मामले में क्या होता है यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
