यूपी का सबसे बड़ा नटवरलाल! 9 सालों में 6 जिलों से उठाई 4.5 करोड़ सैलरी, हिल गया डिप्टी सीएम का महकमा
Biggest Fraud of UP: यूपी स्वास्थ्य विभाग में 2016 में हुई एक्स-रे टेक्नीशियन भर्ती में हुए घोटाले से हड़कंप मचा हुआ है। यहां एक ही नाम से कई जगहों पर फर्जी नियुक्तियों का मामला सामने आया है।
- Written By: अभिषेक सिंह
अर्पित सिंह व एफआईर कॉपी (सोर्स- सोशल मीडिया)
UP News: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने पूरे महकमा-ए-सेहत में हड़कंप मचा दिया है। यहां सरकार को चकमा देकर एक ही नाम और पहचान के युवक ने 6 जिलों में नौकरी करते हुए 9 साल तक सैलरी ली और मामले का खुलासा होते ही फुर्र हो गया।
उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में 2016 में हुई एक्स-रे टेक्नीशियन भर्ती में हुए घोटाले से हड़कंप मचा हुआ है। आरोप है कि एक ही नाम से कई जगहों पर फर्जी नियुक्तियां की गईं, जिससे विभागीय अधिकारी भी हैरान हैं। अब विभागीय जांच के साथ-साथ सरकारी एजेंसियां भी इस मामले की जांच कर रही हैं। वहीं, बांदा के सीएमओ विजेंद्र कुमार ने पूरी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
6 जिलों में बना एक्स-रे टेक्नीशियन
जानकारी के अनुसार, अनिल कुमार पुत्र अर्पित सिंह नाम के इस व्यक्ति ने बांदा समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक्स-रे टेक्नीशियन की नौकरी हासिल की। बताया जाता है कि उसने हर जगह अलग-अलग आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज जमा किए थे। हर जगह नौकरी करते हुए उसने वेतन भी उठाया।
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8 महीने से नरैनी में कर रहा था काम
बांदा के नरैनी स्थित सीएचसी में अर्पित सिंह नाम का एक व्यक्ति करीब 8 महीने से एक्स-रे टेक्नीशियन के पद पर काम कर रहा था। उसने यहां से वेतन भी उठाया और अचानक फरार हो गया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब शासन ने जांच शुरू की और सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई।
शासन स्तर पर होगी कार्रवाई: CMO
नरैनी सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास यादव ने बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी मिली है और उन्होंने सीएमओ को पूरी जानकारी दे दी है। सीएमओ के अनुसार, शासन के निर्देश पर जांच कराई गई है और इसकी पूरी दस्तावेज फाइल और जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई शासन स्तर पर होगी।
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9 साल, 6 जिले और 4.5 करोड़ रूपये
बताया जा रहा है कि अर्पित सिंह नाम के अलग-अलग लोगों ने बलरामपुर, फर्रुखाबाद, रामपुर, बांदा, अमरोहा और शामली में एक्स-रे टेक्नीशियन की नौकरी हासिल की। इन सभी ने अलग-अलग आधार कार्ड, पते और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके नियुक्ति पाई और फिर सालों तक सरकारी सेवा में रहते हुए साढ़े चार करोड़ रुपये का वेतन लिया।
