पकड़े गए दंपति, फोटो- सोशल मीडिया
UP POCSO Court Verdict:: यूपी में रची-बसी यह कहानी किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं है, जहां एक सरकारी जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी मासूमों के शिकारी बन गए। जुर्म की सफाई ऐसी की सालों तक किसी को भनक तक नहीं लगी। 10 साल तक चले इस घिनौने खेल का पर्दाफाश तो तब हुआ जब इंटरपोल और सीबीआई ने मिलकर इनके अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, जो 47 देशों तक फैला हुआ था।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आया यह मामला मानवता को शर्मसार कर देने वाला है। यहाँ सिंचाई विभाग में तैनात रहे पूर्व जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया था, जो साल 2010 से 2020 के बीच मासूम बच्चों को अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। ये आरोपी केवल बच्चों का यौन शोषण ही नहीं करते थे, बल्कि उन कृत्यों के वीडियो और तस्वीरें बनाकर डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचते थे। जांच में सामने आया कि इनके बनाए गए घिनौने वीडियो लगभग 47 देशों तक भेजे गए थे।
आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी का शिकार करने का तरीका बेहद शातिर था। वे गरीब बच्चों को ऑनलाइन गेम खेलने, पैसे, खिलौने या छोटे-छोटे गिफ्ट्स का लालच देकर अपने घर बुलाते थे। एक बार जब बच्चा उनके जाल में फंस जाता, तो शुरू होता था शोषण का वह सिलसिला जो कई बार सालों तक चलता था। जो बच्चे विरोध करते थे, उन्हें डराया-धमकाया जाता था, उल्टा लटकाकर पीटा जाता था या भूखा-प्यासा कमरे में बंद कर दिया जाता था। इस दरिंदगी की हद यह थी कि उन्होंने 3 साल तक के मासूमों को भी नहीं बख्शा। कई बच्चों को इस शोषण के दौरान गंभीर शारीरिक चोटें आईं और वे आज भी मानसिक ट्रॉमा से जूझ रहे हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा साल 2020 में तब हुआ जब इंटरपोल ने डिजिटल एक्टिविटीज के जरिए भारत की जांच एजेंसियों को अश्लील कंटेंट के बारे में अलर्ट भेजा। सीबीआई ने अक्टूबर 2020 में मामला दर्ज किया और रामभवन के ठिकानों पर छापेमारी की। छापेमारी में भारी मात्रा में डिजिटल सबूत मिले, जिसमें पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क में 33 से अधिक बच्चों के वीडियो और 679 आपत्तिजनक तस्वीरें बरामद हुईं। सीबीआई ने फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 74 गवाहों के बयान और ठोस सबूत पेश किए गए।
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बांदा की पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश प्रदीप मिश्रा ने इस मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखा। कोर्ट ने 160 पन्नों के अपने विस्तृत फैसले में रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। इसके साथ ही, दोषियों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए ताकि उनके पुनर्वास और भविष्य को सहारा मिल सके।