शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और आशुतोष महाराज।
Ashutosh Maharaj Court Hearing : धर्म और आस्था की नगरी प्रयागराज में इन दिनों एक ऐसा मामला सुर्खियों में है जिसने आध्यात्मिक जगत को झकझोर कर रख दिया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के साथ कथित यौन शोषण के मामले में प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। जज विनोद कुमार चौरसिया ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब यह निर्णय तय करेगा कि शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी या यह मामला खारिज कर दिया जाएगा।
आज दोपहर 2 बजे जब सुनवाई शुरू हुई तो माहौल काफी तनावपूर्ण था। मामले के शिकायतकर्ता और खुद वकील की भूमिका निभा रहे आशुतोष महाराज (जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य) ने कोर्ट में भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि दो शिष्यों ने मुझे अपनी आपबीती सुनाई है, जो रूह कंपा देने वाली है। गुरुकुल की आड़ में बच्चों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
जज ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पॉक्सो कोर्ट रूम को खाली कराने का आदेश दिया। बंद कमरे और कैमरों की निगरानी में पीड़ित बच्चों ने जज के सामने अपने साथ हुए शोषण की पूरी कहानी बयां की। आशुतोष महाराज के अनुसार, बच्चों ने कोर्ट को बताया कि कैसे शिविर में उन्हें यह कहकर बरगलाया जाता था कि जो उनके साथ हो रहा है, वही असली गुरु सेवा है।
सुनवाई के दौरान आशुतोष महाराज ने अपनी जान को खतरा बताते हुए कहा कि उन्हें बम से उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कोर्ट के सामने कई सीडी भी पेश की हैं, जिन्हें उन्होंने सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि ये साक्ष्य इतने पुख्ता हैं कि सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। जब जज ने उनसे पूछा कि वह पीड़ितों के क्या लगते हैं तो उन्होंने गुरु परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि न्याय न मिलने पर बच्चों ने उनसे संपर्क किया और अब वे ही इनके अभिभावक हैं।
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कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय आशुतोष महाराज काफी भावुक दिखे और उनके आंसू छलक आए। उनके साथ चेहरे ढके हुए नाबालिग बच्चे भी थे। उन्होंने मीडिया से कहा कि बच्चों ने सब सच बोल दिया है। अब फैसला न्यायपालिका के हाथ में है। मुझे और इन बच्चों को यहां खतरा है, इसलिए हमें प्रयागराज छोड़कर जाना पड़ रहा है। दूसरी ओर शंकराचार्य के वकीलों ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है और मामले के अध्ययन के लिए और समय की मांग की है। अब सबकी निगाहें कोर्ट के उस फैसले पर टिकी हैं, जो देश के एक बड़े आध्यात्मिक पद पर बैठे व्यक्तित्व और मासूम बच्चों के भविष्य से जुड़ा है।