अखिलेश यादव, फोटो- सोशल मीडिया
Sambhal Violence Report: संभल हिंसा जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति गरमा गई है और समाजवादी पार्टी व भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, संभल में योजनाबद्ध दंगों के चलते हिंदुओं की जनसंख्या में भारी गिरावट आई है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले जहां हिंदू आबादी 45 प्रतिशत थी, अब वह घटकर 15 प्रतिशत रह गई है, वहीं मुस्लिम आबादी में वृद्धि होकर वह 85 प्रतिशत हो गई है। अब इस मामले पर सियासी जंग तेज हो गई है।
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर पलायन को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी जानबूझकर पलायन से जुड़ी अफवाहें फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस तरह का प्रचार भाजपा की नौ वर्षों की विफलताओं को छुपाने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह सरकार लोगों में विश्वास पैदा करने, समाज में सौहार्द लाने और युवाओं को रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह केवल एक सांस्कृतिक या सामाजिक विफलता नहीं है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भाजपा सरकार का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। उन्होंने रोजगार मेलों को महज दिखावा बताया और स्किल मैपिंग योजनाओं को पूरी तरह नाकाम बताया। अखिलेश ने दावा किया कि ऐसे निराधार प्रचार के कारण प्रदेश की छवि धूमिल हो रही है, जिससे निवेशकों का विश्वास भी उठता जा रहा है।
दूसरी ओर, प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने इस रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि रिपोर्ट कहती है कि संभल में हिंदू आबादी 45 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गई है, तो इस दौरान बाकी लोग कहां गए? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या इन लोगों ने पलायन किया, धर्म परिवर्तन किया या फिर वे मारे गए? गुलाब देवी के इन सवालों ने भी राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
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सपा और भाजपा के बीच चल रही यह जुबानी जंग इस मुद्दे को और भी ज्यादा राजनीतिक रंग दे रही है। रिपोर्ट के तथ्यों को लेकर दोनों दल अपने-अपने ढंग से व्याख्या कर रहे हैं। सपा जहां इसे भाजपा की नाकामी के तौर पर पेश कर रही है, वहीं भाजपा इसे कानून-व्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन से जोड़ रही है।