स्वामीबाग विवाद पर फिर गरमाई सियासत; पेड़ कटान, कूड़ा निस्तारण और पशु क्रूरता पर उठी जांच की मांग
Agra News: आगरा के स्वामीबाग विवाद को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में पशु क्रूरता, कथित अवैध पेड़ कटान, कूड़ा निस्तारण में अनियमितता, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए।
- Reported By: प्रदीप कुमार रावत | Edited By: स्निग्धा श्रीवास्तव
पशु एवं पर्यावरण प्रेमियों की प्रेस वार्ता (सोर्स- फोटो नवभारत)
Agra Swamibagh Dispute: स्वामीबाग को लेकर चल रहे विवाद ने अब एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कमला नगर स्थित होटल टैम्पटेशन में शुक्रवार को पशु एवं पर्यावरण प्रेमियों की प्रेस वार्ता में स्वामीबाग और नगर पंचायत से जुड़े कई गंभीर आरोप सार्वजनिक मंच से उठाए गए। पशु क्रूरता, कथित अवैध पेड़ कटान, कूड़ा निस्तारण में अनियमितता, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर वक्ताओं ने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रेस वार्ता में सेवानिवृत्त डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. अँगशूला सरकार, आरटीआई एक्टिविस्ट विशाल सैनी, मेंबर एसपीसीए एवं पशु प्रेमी विनीता अरोड़ा तथा पशु प्रेमी किरन सेठिया ने अपने-अपने पक्ष रखे। वक्ताओं का कहना था कि यदि समय रहते शिकायतों और उठाए गए सवालों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो इसका सीधा असर पर्यावरण, पशु संरक्षण और जनहित पर पड़ सकता है।
हजूरी बाग में पशु क्रूरता का मामला बना बड़ा मुद्दा
प्रेस वार्ता में हजूरी बाग क्षेत्र में कथित पशु क्रूरता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं के मुताबिक, गीता भाटिया, PETA और अन्य पशु प्रेमियों की ओर से पिछले करीब आठ महीनों से लगातार शिकायतें की जा रही थीं। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बाद में मामला न्यू आगरा थाने तक पहुंचा, जहां कथित तौर पर कुत्तों को मुक्त तो कराया गया, लेकिन एफआईआर दर्ज न किए जाने पर सवाल खड़े हुए।
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हरे पेड़ों की कटाई पर वन विभाग से सवाल
स्वामीबाग क्षेत्र में हरे पेड़ों की कथित कटाई को लेकर भी प्रेस वार्ता में चिंता जताई गई। आरोप लगाया गया कि एक अनरजिस्टर्ड ट्रस्ट और नगर पंचायत स्तर पर ऐसे प्रस्ताव पारित किए गए, जो उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की भावना के विपरीत हैं। शिकायतें होने के बावजूद वन विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी वक्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए।
कूड़ा निस्तारण केंद्र या सिर्फ कूड़ा जमा करने की जगह?
नगर पंचायत की कूड़ा निस्तारण परियोजना भी सवालों के घेरे में रही। आरोप लगाया गया कि जिस स्थान को कूड़ा निस्तारण केंद्र के रूप में दर्शाया जा रहा है, वहां वास्तविक रूप से कूड़े का वैज्ञानिक निस्तारण होने के बजाय केवल संग्रहण किया जा रहा है। वक्ताओं ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की आशंका जताते हुए पूरे प्रकरण की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग की।
फर्जी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की मांग
प्रेस वार्ता में विभिन्न परियोजनाओं और कार्यों से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि दस्तावेजों की वास्तविकता सामने लाने के लिए रिकॉर्ड की गहन जांच के साथ फोरेंसिक परीक्षण कराया जाना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो।
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RTI एक्टिविस्ट ने लगाए उत्पीड़न के आरोप
आरटीआई एक्टिविस्ट विशाल सैनी ने आरोप लगाया कि जनहित से जुड़े सवाल उठाने की वजह से उन्हें मानसिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर परेशान किया गया। उनका कहना था कि यदि किसी नागरिक की आवाज दबाने की कोशिश होती है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है।
प्रेस वार्ता में पंकज पाठक, विष्णु चौहान, मनोज जुरेल, अरुण समेत कई स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन किया।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें
प्रेस वार्ता के अंत में वक्ताओं ने मांग रखी कि स्वामीबाग से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, दस्तावेजों और साक्ष्यों का सत्यापन हो, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा शिकायतकर्ताओं और संभावित गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वक्ताओं ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कानून के पालन, पर्यावरण संरक्षण, पशु अधिकार और जनहित से जुड़े सवालों का जवाब हासिल करना है। अब यह मामला प्रशासन के पाले में है और देखना होगा कि उठाए गए आरोपों पर जांच और कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।
