कानपुर में छिपा फर्जी आधार कार्ड रैकेट का मास्टरमाइंड, गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज से रवाना हुई पुलिस टीम

Aadhaar Card: प्रयागराज में फर्जी आधार कार्ड रैकेट की जांच में कानपुर कनेक्शन सामने आया है। विवेक त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद साइबर पुलिस को मोबाइल से अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
Kanpur Link Emerges as Police Probe Alleged Fake Aadhaar Card Network in Prayagraj
आरोपी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Fake Aadhaar Card Racket Kanpur Connection: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की वेबसाइट में सेंध लगाकर फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में प्रयागराज निवासी और आईपीएस ई-सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के असिस्टेंट रीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर (एआरपीएम) विवेक त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया है। एटीएस की तहरीर पर साइबर थाने में विवेक समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि कई अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

प्रयागराज साइबर क्राइम पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कानपुर का रहने वाला है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम कानपुर भेजी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पिछले कई महीनों में बनाए गए फर्जी आधार कार्डों और पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। जांच के दौरान पुलिस को गिरफ्तार किए गए आरोपी विवेक त्रिपाठी के मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य मिले हैं।

पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए रवाना की विशेष टीम

मोबाइल में जिस तकनीकी नाम से नंबर सेव था वही व्यक्ति गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। मोबाइल नंबर का पंजीकरण और लोकेशन दोनों कानपुर की मिली हैं। इसी आधार पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम रवाना की है। मामले में एक अन्य संदिग्ध युवक को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने विवेक त्रिपाठी से बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल डाटा के विश्लेषण से गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने के तरीके और इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी मिल सकेगी। फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

टेंडर के माध्यम से कराए जाते थे नए आधार कार्ड बनवाने का कार्य

एटीएस को शुरुआती जांच में फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने की सूचना मिली थी। जांच के दौरान प्रयागराज निवासी विवेक त्रिपाठी से पूछताछ की गई। उसके कब्जे से बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच में फर्जी आधार कार्ड बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में सामने आया कि विवेक त्रिपाठी कंपनी में प्रोजेक्ट क्लस्टर इंचार्ज के रूप में कार्यरत था। उसके जिम्मे फ्रेंचाइजी का संचालन और विभिन्न बैंकों में आधार ऑपरेटरों की नियुक्ति थी। यूको बैंक, आर्यावर्त बैंक, इंडियन बैंक और आईडीबीआई बैंक समेत कई बैंकों में नए आधार कार्ड बनवाने और संशोधन का कार्य टेंडर के माध्यम से कराया जाता था। उसका कार्यक्षेत्र प्रयागराज, वाराणसी मंडल और सुल्तानपुर जिला तक फैला हुआ था।

टेंडर खत्म होने के बाद शुरू किया फर्जी खेल

पुलिस के अनुसार, यूको बैंक का टेंडर समाप्त होने के बाद कंपनी ने सिक्योरिटी मनी वापस नहीं की, जिससे ऑपरेटरों में नाराजगी बढ़ी। इसी दौरान विवेक ने एक आधार वेंडर के माध्यम से ऐसे लोगों से संपर्क किया, जिन्होंने फर्जी आधार कार्ड बनाकर अवैध कमाई करने का रास्ता सुझाया। इसके बाद एक संगठित नेटवर्क तैयार कर फर्जी आधार बनाने का काम शुरू किया गया।

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