BHU में 12 साल बाद लौटा ‘मुर्दा’, खुद की पेंशन रुकवाने पहुंचा दफ्तर तो मचा हड़कंप, जानें पूरा मामला
Varanasi News: बीएचयू में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां कर्मचारी रमाशंकर राम सात साल बाद लौट आए। इस दौरान उनकी पारिवारिक पेंशन परिवार को पांच साल से अधिक समय तक जारी रही थी।
- Written By: अर्पित शुक्ला
फाइल फोटो (Image- Social Media)
BHU News: बीएचयू में एक जीवित कर्मचारी के परिवार को पांच साल से अधिक समय तक पेंशन दिए जाने का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इसकी जानकारी तब सामने आई, जब कर्मचारी रमाशंकर राम की ओर से कुलसचिव कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन को तुरंत रोकने के आदेश जारी किए गए। प्रशासन अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
मामले के अनुसार, एबी हॉस्टल कमच्छा में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत रमाशंकर राम सामान्य प्रशासन में टाइपिस्ट और वित्त विभाग में कैशबुक से जुड़े कार्य कर चुके थे। वर्ष 2013 में रमाशंकर राम अचानक लापता हो गए थे। परिवार की ओर से 19 मई 2013 को लंका थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सात साल तक इंतजार के बाद बीएचयू प्रशासन की ओर से कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन शुरू कर दी गई।
पारिवारिक पेंशन पर रोक लगाने का आदेश
इसी बीच नवंबर 2025 में अचानक कर्मचारी रमाशंकर राम वापस लौट आए। कर्मचारी का कहना है कि 2007 के बाद उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था और शरीर के बाएं हिस्से में लकवा भी मार गया था। इतने वर्षों तक वह कहां रहे, इसकी उन्हें कोई स्पष्ट याद नहीं है। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद धीरे-धीरे उनकी स्मृति लौटने लगी और तब उन्हें पता चला कि उनके परिवार को पेंशन दी जा रही है। इसके बाद उन्होंने 7 नवंबर और 25 नवंबर को बीएचयू के कुलसचिव कार्यालय में पत्र देकर अपनी जीवित होने की दावेदारी का प्रमाण प्रस्तुत किया। साथ ही पारिवारिक पेंशन बंद करने और दी गई राशि की रिकवरी की मांग भी की।
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इस अजीबोगरीब मामले के सामने आने के बाद बीएचयू के सेवा पुस्तिका एवं निवृत्तिका अनुभाग की ओर से 29 नवंबर को पारिवारिक पेंशन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया। हालांकि, बीएचयू प्रशासन अभी भी कर्मचारी के जीवित होने से जुड़े औपचारिक प्रमाण जुटाने में लगा हुआ है।
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सात साल तक प्रतीक्षा का नियम
कर्मचारी की गुमशुदगी और पेंशन से जुड़े नियमों पर पेंशन अनुभाग के एक अधिकारी ने बताया कि किसी कर्मचारी के लापता होने की स्थिति में नियमानुसार सात साल तक प्रतीक्षा की जाती है। इस अवधि के बाद पुलिस रिपोर्ट और अदालत के आदेश के आधार पर उसे मृत मानते हुए परिवार को पेंशन दी जाती है। लंबे समय तक लापता रहने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्त मानने का भी प्रावधान है। रमाशंकर राम के मामले में भी पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
