Iran War Impact: ईरान युद्ध से भारत के रियल एस्टेट पर भारी असर, 5.4 लाख घरों की डिलीवरी पर संकट
Iran War Impact: पश्चिम एशिया के संघर्ष का भारत के रियल एस्टेट पर गहरा असर दिख रहा है। कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में 5.4 लाख फ्लैट्स की डिलीवरी में देरी हो सकती है।
- Written By: प्रिया सिंह
रियल एस्टेट (सोर्स- AI इमेज)
Iran War Impact On Indian Real Estate: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष और अस्थिरता का असर अब भारत के हाउसिंग मार्केट पर पड़ रहा है। एनारॉक की नई रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध के कारण भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने और मालभाड़े में अचानक हुई वृद्धि ने डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस कारण देश के सात बड़े शहरों में घर खरीदारों को अपने सपनों के घर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 से 2023 के बीच लॉन्च हुए कई बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स अब अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच चुके हैं। इसी वजह से डेवलपर्स ने साल 2026 में रिकॉर्ड 5.4 लाख आवासीय इकाइयों की डिलीवरी का एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखा था। लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और शिपिंग रूट्स पर अनिश्चितता से यह लक्ष्य अब काफी ज्यादा प्रभावित होता दिख रहा है। स्टील और एल्युमिनियम जैसे अहम बिल्डिंग मैटेरियल्स के दाम बढ़ने से प्रोजेक्ट्स की लागत बहुत तेजी से ऊपर जा रही है।
मुंबई और पुणे पर सबसे ज्यादा असर
एनारॉक की रिपोर्ट के अनुसार इस भू-राजनीतिक तनाव का सबसे ज्यादा असर मुंबई महानगर रिजन (MMR) और पुणे के हाउसिंग मार्केट पर है। इन दोनों ही शहरों में इस साल डिलीवर होने वाले घरों की कुल संख्या डिलीवरी लक्ष्य का 57% है। एमएमआर में साल 2026 के दौरान 2.07 लाख से अधिक घरों की डिलीवरी पूरी तरह से प्रस्तावित है। वहीं दूसरी ओर पुणे शहर में भी करीब 1 लाख घरों की पजेशन खरीदारों को दी जानी है।
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इस ग्लोबल संकट का बुरा प्रभाव केवल महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है बल्कि दक्षिण भारत भी इससे जूझ रहा है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में 1.68 लाख से ज्यादा घरों की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है। इसमें मुख्य रूप से बेंगलुरु में 69,000 यूनिट और हैदराबाद में 63,700 यूनिट की डिलीवरी पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा चेन्नई में भी करीब 35,600 हाउसिंग यूनिट्स की पजेशन में देरी होने की पूरी आशंका जताई गई है।
कोविड काल के जैसे हालात बनने का डर
रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों ने मौजूदा स्थिति की तुलना साल 2020 के भयानक कोविड-19 लॉकडाउन से भी की है। साल 2020 में देश के सात बड़े और प्रमुख शहरों में कुल 4.66 लाख घरों की डिलीवरी का बड़ा लक्ष्य रखा गया था। लेकिन लॉकडाउन, श्रमिकों के अचानक हुए पलायन और पूरी तरह बाधित सप्लाई चेन के कारण बिल्डर अपने वादे पूरे नहीं कर पाए थे। उस समय केवल 2.14 लाख घर यानी लक्ष्य के 46% घर ही तय समय पर अपने खरीदारों को मिल पाए थे।
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एनारॉक के रिसर्च एंड एडवाइजरी प्रमुख प्रशांत ठाकुर ने बताया है कि डेवलपर्स की मौजूदा वित्तीय स्थिति पहले से काफी ज्यादा मजबूत है। तकनीक की शानदार मदद से इन दिनों हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग भी बहुत ही बेहतरीन और मजबूत तरीके से हो रही है। लेकिन लंबे समय तक जारी रहने वाला यह विदेशी तनाव भारतीय प्रोजेक्ट्स की पूरी अर्थव्यवस्था पर बहुत ही भारी दबाव डाल सकता है। अगर चीजें जल्द ही सामान्य नहीं हुईं तो बिल्डरों की लागत बढ़ेगी और ग्राहकों को भी इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ेगा।
