
वृंदावन मंदिर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए संपूर्ण वृंदावन ही श्रीकृष्ण का मंदिर है। वृंदावन में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। इस जन्माष्टमी बांके बिहारी श्रीकृष्ण के दर्शन करने उनके जन्मोत्सव को करीब से देखने अगर आप वृन्दावन जा रहे है तो साथ ही वहां के इन खास मंदिरों में दर्शन करना बिल्कुल न भूले।
वृंदावन की हर एक जगह ऐसी है जहां से श्रीकृष्ण का कोई न कोई किस्सा जुड़ा है। चाहे वो बचपने में रास रचाने का स्थान हो या अपने सखों के संग खेलने का वृंदावन की भूमि का हर स्थान वहां के रहवासियों के लिए और कृष्ण भक्त के लिए बेहद खास है। लेकिन वहां कुछ ऐसी जगहें भी है जहां से श्रीकृष्ण का विशेष नाता है। तो इस बार यदि आप वृंदावन जाने का प्लान बनाए तो इन स्थानों पर जाना न भूलें।
वृंदावन में श्रीकृष्ण ने कई स्थानों पर लीलाएं की जिसे देखने वहां लोग खास जाते है। यहां का निधिवन श्रीकृष्ण की उन्हीं लीलाओं की एक जगह है। ऐसी मान्यता है कि इस वन में आज भी श्रीकृष्ण आते है और गोपियों संग रासलीला रचाते हैं। इस कारण रात के समय वहां किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं होती।
निधिवन (सौजन्य-सोशल मीडिया)
मथुरा-वृंदावन की यात्रा करें तो प्रेम मंदिर भी काफी प्रसिद्ध मंदिर है। इस प्रेम मंदिर का निर्माण 2001 में जगद्गुरु कृपालु जी महाराज द्वारा करवाया गया था। ये भव्य मंदिर बेहद खूबसूरत भी है और अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है। रात के समय यहां ज्यादा भीड़ होती है क्योंकि यहां होनेवाला लाइट शो देखने लायक होता और अद्भुत होता है।
प्रेम मंदिर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
वृंदावन में श्रीकृष्ण के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है बांके बिहारी मंदिर। बांके बिहारी मंदिर की ऐसी मान्यता है कि यहां स्थापित श्रीकृष्ण का विग्रह यहां स्वयं प्रकट हुई है। इस खास मंदिर में जन्माष्टमी बहुत ही भव्य रूप में मनाई जाती है जहां देश दुनिया से लोग इसके दर्शन करने हजारों की संख्या में यहां पहुंचते है।
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वृंदावन में मौजूद भगवान कृष्ण के गोविंद देव मंदिर को राजा मानसिंह ने सन 1590 में बनवाया था। यहां ऐसा माना जाता है कि यह वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि अपने दौर में यह मंदिर 7 मंजिला हुआ करता था।
लेकिन, मुगलकाल के दौरान तत्कालीन मुगल आक्रांता औरंगजेब ने इस मंदिर को नष्ट करने की कोशिश की थी। उन्होंने इस मंदिर की चार मंजिलों को गिरा दिया था। तब से लेकर यह मंदिर आज भी 3 मंजिल का ही है।
राधा गोविंद देव मंदिर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
वृंदावन में स्थित इस्कॉन मंदिर यहां आने वाले लोगों के बीच एक मुख्य आकर्षण केंद्र है। इस मंदिर के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद थे, जिन्होंने खुद इस इस्कॉन मंदिर की नींव रखी थी। यहां देश ही नहीं, बल्कि विदेश से भी कई भक्त दर्शन करने पहुंचते हैं। इस्कॉन मंदिर को श्री कृष्ण बलराम मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।
इस्कॉन मंदिर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
श्री रंगनाथ मंदिर वृंदावन-मथुरा मार्ग पर स्थित है जो वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर आपको अपनी दक्षिण भारत की सभ्यता याद दिलाएगा। ये मंदिर दक्षिण सभ्यता में बना होने के कारण काफी मशहूर है।
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साथ ही यहां का मुख्य आकर्षण ये है कि यहां श्रीकृष्ण की मूर्ति एक दूल्हे के रूप में मौजूद है। यह मंदिर खासतौर पर एक दक्षिण भारतीय वैष्णव संत- भगवान श्री गोदा रणगमन्नार और कृष्ण के अवतार- भगवान रंगनाथ को समर्पित है।






