पीएम मोदी और शाह के खिलाफ FIR? सुप्रीम अदालत ने लगाई वकील की क्लास, पूछा- आपको वकालत का लाइसेंस किसने दिया?

Legal News: सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करने वाले वकील को फटकरा लगाई है। यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) से जुड़ा है।
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कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करने वाले वकील को फटकरा लगाई है। यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) से जुड़ा है। हालांकि, जब वकील ने बाद में कोर्ट से वादा किया कि वह फिर कभी फालतू याचिका दायर नहीं करेगा, तो चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका खारिज कर दी और उससे खर्च वसूलने पर रोक लगा दी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने राजस्थान हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने वकील को CAA लागू करने के खिलाफ PM मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के खिलाफ "फालतू" याचिका दायर करने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया था।

CJI ने लगाई वकील की क्लास

CJI सूर्यकांत ने वकील पूरन चंद्र सेन से यह भी पूछा, "क्या हाई कोर्ट ने उन पर खर्च नहीं लगाया था?" आपने बैंड नहीं पहना है...ऐसा लगता है जैसे आप किसी कुश्ती मैच में हिस्सा लेने आए हैं...' CJI ने उन्हें डांटा, और पूछा, "आप कितने साल से वकालत कर रहे हैं?

लाइसेंस देने की गलती किसने की?

जस्टिस सूर्यकांत ने वकील से पूछा कि आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की? प्लीज़ ऐसी पिटीशन फाइल न करें। बेंच ने वकील से पूछा कि संसद से कानून बनाने वाले संवैधानिक अधिकारियों के खिलाफ FIR फाइल करने के लिए कहने का कौन सा प्रोसेस इस्तेमाल किया जा सकता है।

'संसद में कानून बनाना क्राइम है?'

इस बारे में जस्टिस बागची ने पिटीशनर से कहा कि आपके अलग-अलग सामाजिक संगठनों के साथ राजनीतिक और सामाजिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ये मतभेद क्राइम नहीं हैं। मुख्य सवाल यह है कि अगर संसद कोई कानून पास करती है तो क्या इसे क्राइम माना जा सकता है? आप एक वकील हैं, प्लीज खुद से पूछें!

सुनवाई के दौरान पता चला कि पिटीशनर पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल में रजिस्टर्ड है। CJI सूर्यकांत ने जवाब दिया कि ओह, तो आप पंजाब और हरियाणा (बार) से हैं? तो फिर आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की? मैं इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं हूं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि वकील होने के बावजूद पिटीशनर का लगातार फालतू पिटीशन फाइल करना लीगल प्रोफेशन की क्रेडिबिलिटी पर सवाल खड़े करेगा। उन्होंने कहा कि प्लीज़ ऐसी फालतू पिटीशन फाइल न करें। आप एक वकील हैं। लोग अब भी लीगल कम्युनिटी को सीरियसली लेते हैं। अगर आप ऐसे केस फाइल करने लगेंगे, तो वे आप पर कैसे भरोसा करेंगे?

आखिर में फाइन पर लगाई रोक

एक बार तो वकील के बर्ताव से नाखुश होकर, बेंच ने हाई कोर्ट द्वारा उस पर लगाए गए फाइन को 50,000 से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की धमकी भी दी। आखिर में कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वकील ने वादा किया था कि वह दोबारा ऐसी पिटीशन फाइल नहीं करेगा और इसी शर्त पर फाइन पर रोक लगाई जाएगी।

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